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ईरानी तेल के जहाजों ने पार किया अमेरिकी नाकेबंदी का ज़ोन, 2 महीने बाद फिर शुरू हुआ तेल निर्यात

Iran Oil Export Begins: अमेरिका से डील के बाद ईरान के तेल का निर्यात करीब 2 महीने बाद फिर से शुरू हो गया है।

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भारत

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Tanay Mishra

Jun 17, 2026

Iran oil tankers

ईरानी तेल के जहाज (File Photo)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच शांति डील हो गई है और दोनों पक्षों की तरफ से इस पर डिजिटल हस्ताक्षर भी कर दिए गए हैं। स्विट्रज़रलैंड (Switzerland) में 19 जून को इस डील पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे जिसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता पूरी तरह से लागू हो जाएगा। इसी दौरान दौरान डील से जुड़ी सभी शर्तों को भी दुनिया के सामने रखा जाएगा। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को भी खोल दिया है और अमेरिकी नाकेबंदी हटा ली गई है। 19 जून को इस रणनीतिक जलमार्ग को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। इसी बीच अब ईरान के तेल के जहाजों होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी के ज़ोन को पार करना शुरू कर दिया है।

2 महीने बाद फिर शुरू हुआ तेल निर्यात

TankerTrackers वेबसाइट के अनुसार ईरानी तेल से लदे 2 जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी के इलाके को पार कर लिया है। इसके बाद एक अन्य जहाज ने भी होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी के इलाके को पार कर लिया। इसके साथ ही करीब 2 महीने बाद ईरान ने फिर से तेल का निर्यात शुरू कर दिया है।

ईरान को होगा ज़बरदस्त फायदा

AIS डेटा के अनुसार पहले नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के 2 VLCC सुपरटैंकर जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी के जोन को पार किया। दोनों जहाजों में कुल मिलाकर 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल है। वहीँ NITC का तीसरा जहाज, जो कि एक स्वेज़मैक्स है, 1 मिलियन बैरल ईरानी कच्चे तेल के साथ नाकेबंदी के जोन को पार कर गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान में कच्चे तेल के भंडार है और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और अमेरिकी नाकेबंदी हटने से ईरान को तेल के निर्यात के ज़रिए ज़बरदस्त फायदा होगा।

वैश्विक संकट होगा कम

ईरान ने एक बार फिर से तेल का निर्यात शुरू कर दिया है। ईरानी तेल का निर्यात रुकने से भारत (India) समेत कई देशों पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। हालांकि अब युद्ध रुकने, शांति डील होने और ईरानी तेल का निर्यात फिर से शुरू होने की वजह से न सिर्फ ईरान की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचेगा, बल्कि तेल-गैस का वैश्विक संकट भी कम होगा।