
Russia-Ukraine War Update: रूस-यूक्रेन के बीच तनाव चरम पर है। दोनों ही देश एक पर ड्रोन और मिसाइल से अटैक कर रहे हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने वीडियो जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि यूक्रेन ने अपने सबसे भरोसेमंद लंबी दूरी की FP-5 फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल से रूस के वोल्गोग्राड स्थित टाइटन-बैरिकेड्स प्लांट पर सटीक हमला किया। देखें वीडियो-
इस बीच युद्ध को लेकर नाटो के पूर्व सैन्य प्रमुख एडमिरल रॉब बाउर ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि चीन के समर्थन के बिना रूस इतने लंबे समय तक युद्ध जारी नहीं रख सकता था। बाउर ने आरोप लगाया कि भले ही चीन सीधे हथियार देने से इनकार करता हो, लेकिन वह रूस को हथियार बनाने के लिए जरूरी संसाधन और सामग्री उपलब्ध करा रहा है। खुलासे में उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में रूस NATO पर हमला करने का फैसला करता है, तो उसका असली निर्णय मॉस्को नहीं बल्कि बीजिंग में होगा।
बाउर के मुताबिक, रूस और चीन की साझेदारी में अब रूस धीरे-धीरे पार्टनर बनता जा रहा है। इस पूरे युद्ध का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा चीन को मिल रहा है।
इस बीच चीन-रूस की साझेदारी और साथ काम करने को लेकर एक और बड़ी अपडेट सामने आई है। हाल ही में दक्षिण कोरिया ने दावा किया है कि चीन और रूस के करीब 10 सैन्य विमान कुछ समय के लिए उसके कोरिया एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में दाखिल हुए और फिर वापस लौट गए। दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, इन विमानों में बमवर्षक और लड़ाकू विमान शामिल थे। हालांकि, उन्होंने दक्षिण कोरिया की वास्तविक हवाई सीमा का उल्लंघन नहीं किया।
सेना ने बताया कि जैसे ही इन विमानों की गतिविधि का पता चला, वायुसेना के लड़ाकू विमानों को तुरंत अलर्ट पर भेज दिया गया ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यह घटना चीन और रूस के संयुक्त हवाई सैन्य अभ्यास का हिस्सा हो सकती है।
दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट किया कि एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन किसी देश का आधिकारिक हवाई क्षेत्र नहीं होता। यह एक निगरानी क्षेत्र है, जहां विदेशी विमानों से पहले अपनी पहचान बताने की उम्मीद की जाती है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी या टकराव से बचा जा सके।
यह पहली बार नहीं है। पिछले साल भी चीन और रूस के नौ सैन्य विमान इसी क्षेत्र में दाखिल हुए थे। उस समय दक्षिण कोरिया ने दोनों देशों के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। 2019 से चीन और रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान साल में एक-दो बार ऐसी उड़ानें भरते रहे हैं।