
हरियाली बढ़ाने में जापान (Japan) में मियावाकी (Miyawaki) पद्धति काफी प्रचलित है। इसके बावजूद विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों को काटा जाना आम बात है। वहीं पुराने पेड़ों को बचाने के लिए जापान में नेमावाशी (Nemawashi) पद्धति भी अब काफी लोकप्रिय हो रही है। इसमें दशकों या सदियों पुराने और खास महत्व वाले पेड़ों को काटने के बजाय दूसरी जगह सुरक्षित स्थानांतरित किया जाता है। हालांकि इसमें समय कुछ ज़्यादा लगता है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार बड़े और पुराने पेड़ों को सफलतापूर्वक बचाने के लिए सिर्फ मशीन से उखाड़कर दूसरी जगह लगा देना पर्याप्त नहीं होता।
नेमावाशी पद्धति उन पेड़ों के लिए अपनाई जाती है जिनका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या पर्यावरणीय महत्व बहुत ज़्यादा होता है। जापान में ऐसे पेड़ मंदिरों, शिंटो श्राइन, पारंपरिक बगीचों, पार्कों और पुराने इलाकों में होते हैं। ये स्थानीय विरासत का हिस्सा माने जाते हैं। कई मामलों में इन्हें बचाने से जैव विविधता और इलाके की पुरानी पहचान भी बनी रहती है। ऐसे में इन पेड़ों को बचाकर विरासत को संरक्षित रखा जाता है।
नेमावाशी पद्धति का इस्तेमाल करते हुए पेड़ को दूसरी जगह ले जाने का सबसे अहम काम ज़मीन के नीचे होता है। एक्सपर्ट्स पहले उसकी जड़ों को धीरे-धीरे काटकर तैयार करते हैं। वो एक साथ पूरी जड़ें नहीं निकालते, बल्कि कुछ जड़ों की छंटाई करते हैं ताकि तने के पास नई और बारीक जड़े विकसित हो सकें। यही छोटी जड़े पानी और पोषक तत्व सबसे ज्यादा सोखती हैं। इससे पेड़ को नई जगह लगाने के बाद जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है और उसे कम झटका लगता है।
नेमावाशी का शाब्दिक अर्थ है 'जड़ों के चारों ओर तैयारी करना।' यह शुरुआत में बागवानी की तकनीक थी, लेकिन अब यह सिर्फ बागवानी और पेड़ों को बचाने तक सीमित नहीं रही। जापान में व्यापार और राजनीति में भी अब यह शब्द इस्तेमाल होने लगा है। वहाँ नेमावाशी शब्द का मतलब किसी बड़े फैसले से पहले चुपचाप पूरी तैयारी करना होता है। यह नाम और इसके पीछे का विचार पेड़ों को स्थानांतरित करने की इसी पद्धति से लिया गया है।