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नेपाल का भयानक मंजर! पीछे दौड़ रही थी बाढ़, पहाड़ पर ट्रक चढ़ाकर बचा ड्राइवर, एक शख्स ने बिजली के तार पर लटककर बचाई जान

Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ के भयानक मंजर से अब तक लोग दहशत में हैं। भोटेकोशी नदी में अचानक उफान के बाद रामबचन साह आधे घंटे बिजली के तार पर लटके रहे।
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Aug 29, 2026
Nepal Flood News
नेपाक में बाढ़ के बाद लोगों की स्थिति। (फोटो- IANS)

नेपाल की भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक उफन उठी। इससे बचने के लिए कुछ लोगों को भागने का मौका मिला, कुछ को नहीं। बाढ़ को लेकर भारी संख्या में लोग सड़कों पर दौड़ते हुए नजर आए।

यहां तक कि बाढ़ से जान बचाने के लिए कुछ लोग पहाड़ पर भी चढ़ गए। एक ने बिजली के तार को पकड़कर जान बचाई। जिन लोगों की इस भयानक आपदा से जान बच गई है, उन्होंने अपनी आंखों के सामने बस्तियां गायब होते, दोस्त-रिश्तेदार को बहते और अपनों को खोते देखा।

कैसे बिजली के तार ने दी नई जिंदगी?

राउतहाट के राजदेवी नगरपालिका-2 के हजमीनिया गांव के 36 साल के रामबचन साह की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब फैली। वह गंदे कीचड़ से सने, नंगे पैर सड़क पर मुश्किल से चल रहे थे।

पंद्रह साल से त्रिशुली बाजार के पास श्याम स्वीट शॉप में काम करने वाले रामबचन बुधवार सुबह मिठाई बना रहे थे। तभी बाढ़ दुकान में घुस गई। पानी का तेज बहाव उन्हें बहा ले गया। तभी उनका हाथ बिजली के तार पर लगा।

आधे घंटे तक तार पर लटका रहा

रामबचन ने द काठमांडू पोस्ट से बात करते हुए कहा- मैंने तार पकड़ लिया। आधे घंटे तक लटका रहा। नीचे बाढ़ गरज रही थी। हाथ छूट जाता तो जिंदा नहीं बचता। इसी तरह, तार ने उन्हें बचा लिया। लेकिन दुकान में काम करने वाली संगीता, उनके बेटे राहुल और दूसरे कर्मचारी बिनोद भगत अब भी लापता हैं।

रामबचन अब एक दोस्त के यहां ठहरे हैं। डर अभी भी ताजा है। उनके बड़े भाई रबिंद्र ने बताया कि दिन भर कोई खबर नहीं मिली। शाम को ही पता चला कि वह सुरक्षित हैं। रामबचन के दो छोटे बेटे हैं। राउतहाट के मुख्य जिला अधिकारी दिनेश सागर भुसाल के मुताबिक जिले के 12 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

मैं बच गया, लेकिन मामा का पूरा परिवार चला गया

वहीं, झापा के सचिन खाती बच गए क्योंकि बाढ़ आने से पहले उन्हें काम पर भेज दिया गया था। उनके मामा 33 साल के राजकुमार दियाली रसुवा के स्याब्रुबेसी में 15 साल से ज्वेलरी का काम करते थे।

पत्नी श्रीति और चार साल के बेटे श्रीराज के साथ रहते थे। सचिन भी उनके साथ रहकर मदद कर रहे थे। बुधवार सुबह मामा ने सचिन को चिलिमे काम पर भेजा। बाढ़ की खबर सुनते ही वह वापस भागे। तब तक उनकी बस्ती बह चुकी थी।

'जब लौटा तो गांव ही नहीं था'

सचिन ने कहा- जब लौटा तो गांव ही नहीं था। वह अब धुंचे में नेपाली सेना की सुरक्षा में हैं। राजकुमार, श्रीति और श्रीराज लापता हैं। सचिन की बहन राधा खाती रोते हुए बोलीं- कम से कम लाश ही मिल जाए। पूरा परिवार इंतजार कर रहा है। झापा पुलिस के अनुसार, रसुवा काम या व्यापार के लिए गए 13 लोग संपर्क से बाहर हैं।

बाढ़ मेरे पीछे-पीछे दौड़ रही थी

मकवानपुर के थाहा नगरपालिका-2 के फेडिगांव के राजकुमार कार्की ने ट्रक दौड़ाकर जान बचाई। मंगलवार को बेतरावती पहुंचे थे। अगली सुबह तिमुरे सामान लादने जा रहे थे। तभी लाउडस्पीकर पर आवाज आई- बाढ़ आ रही है।

कार्की ने कंटेनर ट्रक घुमाया और गलछी की तरफ भाग निकले। आईने में दीवार जैसी बाढ़ दिख रही थी। आगे के कई ड्राइवर बह गए। किरण भुजेल का कंटेनर भी उनमें शामिल था। कार्की ने बताया- मैं आगे-आगे भागता रहा। पीछे नौ कंटेनर और ड्राइवर बह चुके थे।

पहाड़ पर चढ़ाया ट्रक

धुंगे बाजार से पहले उन्होंने ट्रक पहाड़ पर चढ़ा दिया। रात वहीं बिताई। बेतरावती और आसपास की बस्तियां नदी में बदल गईं। दोस्त बहते दिखे। गुरुवार को सुरक्षाकर्मियों की मदद से काठमांडू पहुंचे और शुक्रवार दोपहर घर लौटे।

बीस साल का अनुभव रखने वाले 36 साल के कार्की पिछले पांच साल से रसुवा से सामान ले जाते हैं। ट्रक सुरक्षित घर खड़ा है, लेकिन देखी गई तस्वीरें दिमाग से नहीं जातीं।

Updated on:
29 Aug 2026 04:13 pm
Published on:
29 Aug 2026 04:13 pm