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नेपाल में बड़ा कानूनी बदलाव! लापता लोगों को 12 साल बाद मृत घोषित करने की शर्त हटाने का अध्यादेश तैयार

Nepal Flood: नेपाल सरकार ने लापता लोगों को मृत घोषित करने की अवधि 12 साल से घटाकर 45 दिन करने का प्रस्ताव दिया है। भोटेकोशी बाढ़ में 6,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
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Oct 08, 2026
Nepal Avalanche
लापता लोगों को मृत घोषित करने की अवधि 12 साल से घटाकर 45 दिन करने का प्रस्ताव, Photo Source@ChatGpt

Missing Persons Nepal: नेपाल की कैबिनेट ने बुधवार को मौजूदा कानूनों में बदलाव करने और लापता लोगों को मृत घोषित करने में आने वाली कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए एक अध्यादेश लाने की सिफारिश की। सिंह दरबार में हुई कैबिनेट की बैठक में आपदाओं से जुड़े कुछ कानूनों में संशोधन करने और इन बाधाओं को हटाने वाले प्रावधानों वाले अध्यादेश की सिफारिश का फैसला किया गया।

सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने पत्रकारों को बताया कि 'भोटेकोशी बाढ़' को देखते हुए किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने के लिए उसके 12 साल तक लापता रहने की मौजूदा शर्त को घटाकर 45 दिन कर दिया जाएगा।

हिमालयी सुनामी में 1,400 से ज्यादा मौतें, 6,000 से ज्यादा लापता

नेपाल में बीते 26 अगस्त को चट्टान और बर्फ के हिमस्खलन (एवलांच) के कारण 'हिमालयी सुनामी' जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। इसमें अब तक 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6,000 से ज्यादा लोगों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है। बाढ़ से प्रभावित इलाकों के कुछ हिस्सों में खोज और बचाव अभियान चल रहे हैं। बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और 70,000 से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित होकर बेघर हो गए हैं।

ग्लेशियर आउटबर्स्ट से बढ़ी तीव्रता, तिमुरे और स्याफ्रू बेसी बहे

अगस्त की बाढ़ में तिब्बत की सीमा से लगे ऊंचे ढलानों पर बसे इलाके बाढ़ की तीव्रता से बुरी तरह प्रभावित हुए। अचानक ग्लेशियर फटने (ग्लेशियर आउटबर्स्ट) के कारण बाढ़ की तीव्रता और बढ़ गई थी। इस इलाके की प्रमुख बस्तियां, तिमुरे और स्याफ्रू बेसी, अचानक आई बाढ़ में पूरी तरह बह गईं। बाढ़ ने 26 अगस्त की सुबह रसुवा जिले में नदी के किनारे बसी बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया और तेज़ी से नुवाकोट और धाडिंग सहित आस-पास के इलाकों को प्रभावित किया।

नेपाल के प्रभावित इलाकों में बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर की ज़रूरत पड़ने का अनुमान है। इसे पूरा होने में कम से कम एक दशक का समय लग सकता है।

बिजली परियोजनाएं, सड़कें और पुल भी तबाह

बुनियादी ढांचे को हुआ नुकसान इस घटना की भयावहता को दर्शाता है। आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं (281 मेगावाट) और चार निर्माणाधीन परियोजनाएं (388 मेगावाट) क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे 431.1 मेगावाट की उत्पादन क्षमता बाधित हुई। गल्छी-बेट्रावती-रसुवागढ़ी सड़क और पृथ्वी राजमार्ग के मुख्य हिस्से नष्ट हो गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। साथ ही 48 सस्पेंशन ब्रिज (झूलते पुल) और 31 मोटर-योग्य पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए

Updated on:
08 Oct 2026 04:09 am
Published on:
08 Oct 2026 04:08 am