विदेश

ईरान युद्ध से भयंकर टूटा पाक, अगले महीने से बत्ती भी हो जाएगी गुल, एक साथ 3 मोर्चों पर गहराया संकट

पाकिस्तान में अगले महीने LNG सप्लाई शून्य होगी। कोयले की किल्लत भी झेलनी पड़ेगी। वहीं, 30 फीसदी बिजली संकट में है। रोज 3 घंटे कटौती और बिल भी बढ़ेगा।
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Apr 03, 2026
Shehbaz Sharif
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)

पाकिस्तान में बिजली का संकट अब उस मोड़ पर आ गया है जहां से वापसी आसान नहीं है। अगले महीने से LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई लगभग शून्य हो जाएगी।

यह वही गैस है जिससे पाकिस्तान की कुल बिजली का पांचवां हिस्सा बनता है। ऊपर से कोयले की किल्लत अलग। दोनों मिलाकर पाकिस्तान की 30 फीसदी बिजली सप्लाई खतरे में आ गई है।

कराची के बिजनेस रिकॉर्डर अखबार ने इस पूरे संकट का जो विश्लेषण किया है वो पाकिस्तान सरकार के लिए आईना दिखाने जैसा है।

सिर्फ ईरान युद्ध नहीं, पाकिस्तान खुद भी जिम्मेदार है

यह संकट सिर्फ ईरान में चल रही जंग की वजह से नहीं है। पाकिस्तान की अपनी गलतियां भी कम नहीं हैं। पाकिस्तान रेलवे और कोयले से चलने वाले बिजलीघरों के बीच विवाद चल रहा है।

रेलवे कोयला लेकर जाने वाले वैगन लोड करने से मना कर रही है। इस झगड़े की वजह से 1500 से 1800 मेगावाट बिजली उत्पादन खतरे में पड़ गया है।

यह कोई बाहरी मुसीबत नहीं है। यह पूरी तरह से एक ऐसी समस्या है जिसे आसानी से टाला जा सकता था। लेकिन नहीं टाला गया।

फर्नेस ऑयल का विकल्प है लेकिन जेब पर पड़ेगा भारी

जब गैस और कोयला नहीं होगा तो पाकिस्तान के पास फर्नेस ऑयल से बिजली बनाने का विकल्प बचता है। लेकिन यह विकल्प बेहद महंगा है। गैस या कोयले से बनने वाली बिजली के मुकाबले फर्नेस ऑयल से बिजली बनाना कहीं ज्यादा खर्चीला है।

इसका सीधा मतलब है कि जो बिजली पहले से महंगी है वो और महंगी हो जाएगी। और यह बोझ आखिर में आम पाकिस्तानी नागरिक पर पड़ेगा।

सरकार का प्लान क्या है, काम करेगा या नहीं

पाकिस्तान सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए तीन काम तय किए हैं। रोजाना दो से तीन घंटे लोड शेडिंग, बिजली के दाम बढ़ाना और बिजली बचाने के उपाय करना।

लेकिन जानकारों का कहना है कि यह प्लान कागज पर तो ठीक लगता है लेकिन असल में कितना काम करेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे लागू कैसे किया जाता है।

सबसे आसान उपाय जैसे बाजार जल्दी बंद करवाना या बड़े दुकानों और होटलों की बत्तियां सीमित करना, इन्हें सरकार के प्लान में शामिल ही नहीं किया गया।

पहले भी इन तरीकों से फर्क पड़ा है लेकिन इस बार इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इसका मतलब साफ है कि संकट का बोझ बड़े व्यापारियों पर नहीं बल्कि आम घरों और छोटे कारखानों पर पड़ेगा।

रेलवे को भी होगा नुकसान, सिस्टम हर तरफ से टूट रहा है

इस पूरे मामले में एक और पहलू है जो कम चर्चा में है। पाकिस्तान रेलवे जो कोयला ट्रांसपोर्ट करने से मना कर रही है, उसकी वजह से रेलवे का अपना माल ढुलाई का कारोबार भी डूबेगा। यानी एक गलती से दो जगह नुकसान हो रहा है।

यह पाकिस्तान की उस बड़ी बीमारी की निशानी है जिसमें सरकारी विभाग आपस में तालमेल नहीं बिठा पाते और नतीजा पूरे देश को भुगतना पड़ता है।

आगे क्या होगा?

संकट की शुरुआत भले ही बाहरी कारणों से हुई हो लेकिन यह कितना बड़ा बनेगा यह पाकिस्तान के अपने फैसलों पर निर्भर है। अगर घरेलू गड़बड़ियां नहीं सुधरीं तो हर बार जब कोई बाहरी झटका लगेगा पाकिस्तान और गहरे संकट में डूबता जाएगा।

Updated on:
03 Apr 2026 06:52 pm
Published on:
03 Apr 2026 06:52 pm
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