Pakistan Water Crisis: पड़ोसी मुल्क पाक से बड़ी खबर सामने आई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि देश में पानी की कमी से स्थिति बिगड़ रही है…
Water Shortage Pakistan: पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय तेल-गैस नहीं बल्कि पानी की संकट से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद चेतावनी दी है कि देश में पानी की स्थिति लगातार खराब हो रही है।
कराची के बिजनेस रिकॉर्डर के एक आर्टिकल के मुताबिक, यह संकट अब सिर्फ गर्मी या मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आर्थिक हालात और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है।
जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना और नदियों के बहाव में बदलाव ने समस्या को और बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ, पानी को जमा करने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। सरकार ने 18 डैम बनाने की बात जरूर कही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दिशा में काफी देरी हो चुकी है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने पानी का यह संकट आने वाले दिनों में और बड़ी चुनौती बन सकता है।
कराची की एक बिजनेस रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था काफी पुरानी और कमजोर है। आज भी बहुत सारा पानी रास्ते में ही रिसाव, खराब ढांचे और गलत प्रबंधन की वजह से बर्बाद हो जाता है और खेतों तक पहुंच ही नहीं पाता। अगर इस कमी को ठीक कर लिया जाए, तो बिना नए पानी के स्रोत खोजे ही हालात काफी बेहतर हो सकते हैं।
पाकिस्तान में राज्यों (प्रांतों) के बीच पानी को लेकर लंबे समय से विवाद चलते आ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह सही और रियल-टाइम डेटा की कमी है। अगर एक भरोसेमंद मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए और उसे बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के ठीक से लागू किया जाए, तो आपसी विश्वास बढ़ सकता है।
सालों से पानी से जुड़ी नीतियां तो बनती रही हैं, लेकिन उन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया। इसलिए जरूरी है कि अब सिर्फ घोषणाओं पर नहीं, बल्कि काम के नतीजों पर ध्यान दिया जाए।
इसके अलावा, सबसे बड़ी समस्या पानी के गलत इस्तेमाल की है। खासकर खेती में आज भी पुराने सिंचाई तरीकों पर ज्यादा निर्भरता है, जिससे पानी की काफी बर्बादी होती है।
इसी आर्टिकल में कहा गया है कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को सस्पेंड करने का कदम पाकिस्तान की पानी की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। पाकिस्तान की नदियां काफी हद तक दूसरे देश से आने वाले पानी पर निर्भर हैं, इसलिए अगर ऊपर की तरफ यानी अपस्ट्रीम में पानी के बहाव में कोई बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है।
आर्टिकल में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में पानी की कमी की समस्या नई नहीं है, इस पर सालों से चर्चा होती रही है। लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि इसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ नए बांध या प्रोजेक्ट बनाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि पानी के इस्तेमाल और उसकी अहमियत को लेकर सोच भी बदलनी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो चेतावनियां तो मिलती रहेंगी, लेकिन समस्या और गहराती जाएगी।