रावलपिंडी में इमरान खान समर्थकों के विरोध के बाद उनकी बहनों और कई नेताओं पर एंटी टेरर केस दर्ज हुआ है। पुलिस और मानवाधिकार संगठनों के बीच इस कार्रवाई को लेकर तीखी बहस जारी है।
पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हाल के दिनों में यह और गहरा हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों और प्रशासन के बीच टकराव अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इसी कड़ी में अब पाकिस्तान पुलिस ने इमरान खान की बहनों समेत उनकी पार्टी के कई नेताओं पर एंटी टेरर कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया है। यह मामला रावलपिंडी के अदियाला रोड पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
रावलपिंडी पुलिस ने इस मामले में इमरान खान की बहनों नोरीन नियाजी और उजमा खानम सहित कई नेशनल और प्रांतीय असेंबली सदस्यों को नामजद किया है। इसके अलावा लगभग 1400 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार एफआईआर में हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का विरोध करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने चेकपोस्ट पर हमला किया, पत्थरबाजी की और सरकारी व निजी वाहनों को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान नौ पुलिसकर्मी घायल हुए। मौके पर 41 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में वे भागने में सफल रहे।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने अदियाला जेल में बंद इमरान खान से मिलने पर लगी पाबंदियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि प्रशासन ने पूरे जिले में 15 दिनों के लिए सेक्शन 144 लागू कर दिया, जिससे किसी भी प्रकार की सभा पर रोक लग गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिनमें खान की बहनें भी शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर बितर किया। प्रशासन का आरोप है कि यह विरोध राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
इस कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना हुई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था) ने इसे अवैध और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। संगठन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में लिया गया और महिलाओं के साथ भी कठोर व्यवहार किया गया। एमनेस्टी के अनुसार, इमरान खान के परिवार को कोर्ट द्वारा निर्धारित मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा रही थी, जिसके चलते यह विरोध हुआ। संगठन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए सेक्शन 144 का दुरुपयोग किया जा रहा है।