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Global Terrorism Index 2026: पाकिस्तान फिर टॉप पर, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान ने चौंकाया

Pakistan: ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रभावित देश बनकर उभरा है। वैश्विक स्तर पर आतंक कम होने के बावजूद पाकिस्तान में मौतें और हमले रिकॉर्ड स्तर पर क्यों बढ़ रहे हैं? फातिमा अल हाशमी की इस विशेष रिपोर्ट में जानें पूरी सच्चाई।
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Apr 11, 2026
Global Terrorism Index
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में आतंकवाद से संबंधित मौतों में पिछले छह वर्षों से हर साल वृद्धि हो रही है। (Photo - IANS)

Pakistan Terrorism Trends: दुनिया भर में आतंकवादी हमलों में 22 प्रतिशत और मौतों में 28 प्रतिशत की कमी आई है, वहीं पाकिस्तान एक अपवाद बनकर उभरा है। पाकिस्तान पिछले वर्ष आतंकवाद से संबंधित 1,139 मौतों के साथ ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में शीर्ष पर रहा। यह जानकारी ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की एक रिपोर्ट में आई है।

ऑनलाइन पत्रिका 'अमेरिकन थिंकर' के लिए लिखते हुए, मोरक्को की शोधकर्ता और पत्रकार फातिमा अल हाशिमी ने कहा कि पाकिस्तान में हिंसा एक आम बात हो गई है। यह पाकिस्तान की तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति की एक गहरी और अधिक खतरनाक वास्तविकता को दर्शाता है, जो लगातार छठे वर्ष बढ़ते आतंकवाद का संकेत है।

आतंकवाद से मौतों में छह वर्षों में हर साल वृद्धि

फातिमा ने बताया कि पाकिस्तान में आतंकवाद से संबंधित मौतों में पिछले छह वर्षों से हर साल वृद्धि हो रही है। हालिया वृद्धि एक दशक में सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। हमलों की संख्या 2023 में 517 से बढ़कर 2024 में 1,099 हो गई, जो कि दोगुने से भी अधिक है। इसके बाद 2025 में इसमें थोड़ी गिरावट आई, हालांकि यह ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर बनी रही। फातिमा के अनुसार, यह रुझान दर्शाता है कि उग्रवादी हिंसा न केवल स्थायी हो गई है, बल्कि अब नए तरीकों से राज्य की क्षमता को चुनौती दे रही है।

खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान हिंसा के केंद्र

हिंसा का सबसे अधिक प्रभाव खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में देखा जा रहा है। साल 2025 में होने वाले कुल हमलों में से 74 प्रतिशत और मौतों में से 67 प्रतिशत इन्हीं दो क्षेत्रों में दर्ज की गई। लंबे समय से शासन और विकास के मामले में उपेक्षित रहे ये क्षेत्र पाकिस्तान के आंतरिक संघर्ष का सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहे हैं।

पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी रणनीति की आलोचना करते हुए फातिमा अल हाशमी ने कहा कि यह पूरी तरह से केवल सैन्य छापों और जवाबी हमलों पर केंद्रित हैं। कट्टरपंथ को रोकने के लिए जरूरी सामाजिक और प्रशासनिक उपाय या तो बहुत कमजोर हैं या पूरी तरह गायब हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के पास एक विश्वसनीय और पारदर्शी आतंकवाद डेटाबेस का अभाव है, जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी दावों की साख कम होती है।

स्थायी शांति के लिए सुधारों की आवश्यकता

रिपोर्ट में यह तर्क भी दिया गया है कि पाकिस्तान जब तक केवल सैन्य शक्ति के बजाय वैचारिक उग्रवाद, राजनीतिक अस्थिरता और शासन की कमियों जैसे गहरे मुद्दों पर ध्यान नहीं देगा, तब तक शांति संभव नहीं है। इस चक्र को तोड़ने के लिए अफगानिस्तान के साथ गंभीर क्षेत्रीय कूटनीति, पुलिस सुधार, विभिन्न एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और न्यायिक सुधारों की सख्त जरूरत है, ताकि आतंकवादियों को प्रभावी ढंग से सजा दी जा सके।

Updated on:
11 Apr 2026 10:51 pm
Published on:
11 Apr 2026 10:51 pm