
Nuclear Attack Threat: चीन और जापान के बीच बढ़ते तनाव के बीच परमाणु हमले को लेकर एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स के एक अध्ययन में चीनी शहरों को संभावित परमाणु हमलों के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट में जापान को दुनिया के लिए 'बड़ा खतरे का संकेत' बताते हुए उसकी परमाणु क्षमता और नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पूरे विश्व को तबाह करने वाले व्यापक परमाणु युद्ध की आशंका भले ही कम हो, लेकिन इसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि पड़ोसी देशों से जारी तनातनी या उग्रवादी विचारधाराओं से प्रेरित होकर छोटे या मध्यम स्तर के परमाणु-सशस्त्र देश और आतंकी संगठन किसी प्रमुख चीनी शहर को निशाना बनाकर 'सिंगल न्यूक्लियर अटैक' जैसा हमला कर सकते हैं।
इस रिपोर्ट में चीन ने जापान को खास तौर पर निशाने पर लिया है। चीन का कहना है कि टोक्यो ने 2017 में लागू हुई अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियारों के निषेध की संधि (TPNW) पर अब तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके अलावा, जापान अपनी सालों पुरानी तीन गैर-परमाणु नीतियों जिनमें परमाणु हथियार न रखना, न बनाना और देश में न आने देना शामिल है। उसमें बदलाव करने पर विचार कर रहा है। चीन ने आरोप लगाया है कि जापान ने गुप्त रूप से हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम तैयार कर लिया है और उसके पास बेहद कम समय में परमाणु हथियार विकसित करने की आर्थिक व तकनीकी क्षमता मौजूद है।
PLA के शोधकर्ताओं ने यह समझने के लिए एक मॉडल तैयार किया कि यदि किसी चीनी शहर पर कम क्षमता वाले परमाणु हथियार से हमला होता है, तो उसके परिणाम क्या होंगे। 1945 के हिरोशिमा हमले और दुनिया भर के सिमुलेशन डेटा के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि ऐसा हमला चिकित्सा सेवाओं के लिए एक संकट खड़ा कर देगा। ऐसे हमले से शहरों में भारी अफरा-तफरी मच जाएगी और रेडिएशन से प्रभावित हजारों लोगों का इलाज करना अस्पतालों के लिए एक बहुत बड़ा संकट बन जाएगा।
इस संभावित संकट से निपटने के लिए बीजिंग ने देश भर में 30 से ज्यादा विशेष इमरजेंसी रेस्क्यू सेंटर बनाए हैं। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि स्थानीय प्रशासन को एंटीबायोटिक्स और रेडिएशन से बचाने वाले उपकरणों का पर्याप्त भंडार हमेशा 'रेडी-टू-यूज' मोड में रखना चाहिए। इसके साथ ही आम लोगों को भी रेडिएशन से बचाव और आपात स्थिति में संयम बनाए रखने की ट्रेनिंग देने की सिफारिश की गई है। ताकि किसी भी आपदा के समय चिकित्सा तंत्र को युद्ध-स्तर पर तैयार रखा जा सकें।