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7 दशकों में नया घटनाक्रम: ओस्लो में पीएम मोदी की खातिर टूटा प्रोटोकॉल, स्वागत के लिए नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने तोड़े सारे नियम

PM Modi Norway Visit:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच चुके हैं, जहां हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया।
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May 18, 2026
PM Narendra Modi arrives at Gardermoen Airport
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे। ( फोटो: ANI)

Bilateral Relations : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यूरोप यात्रा के चौथे चरण में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच गए हैं। ओस्लो एयरपोर्ट पर नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टौरे ने खुद प्रोटोकॉल तोड़ कर पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पिछले 43 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा नॉर्वे का यह पहला ऐतिहासिक द्विपक्षीय दौरा है। अपनी इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान पीएम मोदी तीसरे 'भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में भी हिस्सा लेंगे।

भारत और नॉर्वे के संबंध: कितने पुराने और कैसे हैं रिश्ते ?

भारत और नॉर्वे के बीच संबंध बेहद पुराने, सौहार्दपूर्ण और गहरे हैं। दोनों देशों ने साल 1947 में भारत की आजादी के ठीक बाद अपने राजनयिक संबंधों की शुरुआत की थी। पिछले सात दशकों से अधिक समय में दोनों देशों के बीच लोकतंत्र, मानवाधिकार और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित मजबूत समझ विकसित हुई है। यह ऐतिहासिक दौरा इस बात का प्रमाण है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में उत्तरी यूरोप के लिए भारत का महत्व कितना बढ़ गया है।

आर्थिक सहयोग और बढ़ता व्यापार

दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। साल 2024 में भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.73 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इसके अलावा, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते लागू होने के बाद से दोनों देशों के व्यापारियों के लिए नए रास्ते खुले हैं। नॉर्वे का गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल भारतीय वित्तीय बाजार में लगभग 28 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश कर चुका है, जो भारत की विकास कहानी पर उनके भरोसे को दिखाता है।

क्लीन एनर्जी, ग्रीन टेक और ब्लू इकोनॉमी

भारत और नॉर्वे के रिश्तों का सबसे मजबूत स्तंभ 'समुद्री अर्थव्यवस्था' और पर्यावरण सहयोग है। दोनों देश समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, समुद्री प्रदूषण को रोकने और शिपिंग क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक साझा करने पर मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, नॉर्वे अपनी ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी और क्लीन टेक्नोलॉजी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जिसका लाभ उठाकर भारत अपने सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा कर रहा है।

रणनीतिक महत्व और आर्कटिक नीति

भले ही भारत आर्कटिक क्षेत्र का हिस्सा नहीं है, लेकिन वह आर्कटिक काउंसिल का एक प्रमुख स्टेकहोल्डर है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में नॉर्वे के साथ मिलकर आर्कटिक क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण पर काम करना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इस यात्रा से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि डिफेंस, स्पेस और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होगा।