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Oil Revenue में आया बंपर उछाल: ईरान से जंग के बीच अमेरिका की एक छूट से रूस की हुई चांदी

Sanctions Relief:ईरान के साथ युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। इसे नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी, जिसका सीधा फायदा रूस की अर्थव्यवस्था को हुआ है।

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Apr 14, 2026
Russian President Vladimir Putin
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Photo- IANS)

Crude Oil Exports: हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने दुनिया के सामने एक बेहद चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के महीने में रूस की कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली कमाई लगभग दोगुनी हो गई है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब दुनिया एक तरफ तनाव और युद्ध का सामना कर रही है। दरअसल, ईरान के साथ चल रहे अमेरिका-इजराइल के ईरान के साथ युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट गहरा गया था। पेट्रोल-डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक बाजार में हाहाकार मचा दिया था। इसी बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट को शांत करने के लिए अमेरिका को एक बड़ा कदम उठाना पड़ा।

मार्च में रूस ने कमाए 19 अरब डॉलर

यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि प्रतिबंधों में मिली इस थोड़ी सी छूट ने रूस के खजाने भर दिए हैं। पिछले महीने यानि मार्च में रूस ने तेल बेच कर करीब 19 अरब डॉलर की भारी-भरकम कमाई की। अगर हम फरवरी के आंकड़ों पर नजर डालें, तो रूस का कच्चे तेल और तेल उत्पादों का निर्यात मात्र 320,000 बैरल प्रति दिन था। लेकिन जैसे ही अमेरिका ने प्रतिबंधों में ढील दी, मार्च में यह आंकड़ा रॉकेट की तरह उछल कर 7.1 मिलियन बैरल प्रति दिन के पार पहुंच गया।

क्या थी अमेरिका की मजबूरी ?

आपको याद होगा कि अमेरिका और पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर कई कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसका मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना था ताकि वह युद्ध का खर्च न उठा सके। रूसी कच्चे तेल की बिक्री पर भी सख्त पाबंदियां थीं। लेकिन, ईरान के साथ छिड़े युद्ध ने समीकरण बदल दिए। तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने की मजबूरी के चलते अमेरिका को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ा। अमेरिका ने उन देशों को 11 अप्रेल तक समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे दी, जो पहले से ही ट्रांजिट में था।

अर्थव्यवस्था को मिली संजीवनी

यह फैसला वैश्विक बाजार को राहत देने के लिए था, लेकिन इसका सबसे बड़ा सीधा फायदा मॉस्को को मिला है। जिन प्रतिबंधों के कारण रूस का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो रहा था, उसी में मिली अस्थायी छूट ने रूसी अर्थव्यवस्था को एक नई संजीवनी दे दी है। आसान भाषा में समझें तो, दुनिया की मजबूरी रूस के लिए एक बड़ा अवसर बन गई है।

अमेरिका का यह कदम बाजार की मजबूरी

वैश्विक ऊर्जा विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम बाजार की मजबूरी था, लेकिन कूटनीतिक रूप से इसने रूस को एक बड़ा आर्थिक बैकअप दे दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि 11 अप्रैल की समय सीमा खत्म होने के बाद अमेरिका क्या कदम उठाता है। क्या तेल की कीमतें स्थिर रखने के लिए छूट जारी रहेगी या रूस पर फिर से नकेल कसी जाएगी? इस पूरी भू-राजनीतिक स्थिति में भारत और चीन जैसे देशों का रुख भी महत्वपूर्ण है, जो लगातार रूस से रियायती दरों पर भारी मात्रा में तेल खरीद कर अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत कर रहे हैं।