ईरान और US-इजरायल के बीच जारी जंग को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है। अब इस जंग को रोकने के लिए रूस ने हाथ बढ़ाया है।
US-Israel Conflict: ईरान और US-इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुई जंग जारी है। पूरी दुनिया की ईरान-इजरायल युद्ध (Iran and US-Israel War) पर नजर है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) और सुरक्षा को प्रभावित किया है। फिलहाल, इस जंग के थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे समय में रूस ने ईरान और US-इजरायल युद्ध विराम (Ceasefire) को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। रूस ने युद्ध विराम के लिए मध्यस्थता करने पर सहमति जताई है। रूस की इस पहल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और अमेरिका-इजरायल संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थता करने की पेशकश की है। रूस की सरकारी मीडिया एजेंसी इंटरफैक्स के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन क्षेत्रीय नेताओं के साथ निरंतर संपर्क में हैं। वे मॉस्को क्षेत्र में शांति बहाल करने में सक्रिय मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा- राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन क्षेत्रीय नेताओं के संपर्क में हैं। पेस्कोव के मुताबिक, पुतिन ने कहा है कि शांति बहाल करने के लिए यदि किसी भी तरह से उनकी सेवाओं की आवश्यकता होती है तो वे तैयार हैं। पुतिन ने कहा कि हम निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करने में अपना योगदान देंगे कि सैन्य स्थिति जल्द से जल्द शांतिपूर्ण मार्ग पर अग्रसर हो।
रूस, ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव को समाप्त करने और युद्ध विराम के प्रयासों में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पुतिन ने स्थिति को सामान्य करने और संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करने का संकल्प व्यक्त किया है। ईरान ने रूस की पहल का स्वागत किया है। ईरान के रूस में राजदूत काजेम जलाली ने कहा कि तेहरान मॉस्को की मध्यस्थता को सकारात्मक रूप से देखता है। रूस, ईरान के हितों का ध्यान रखते हुए प्रयास करेगा।
रूस ने सीजफायर की पहल की है। रूस से पहले चीन और पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका तनाव कम करने के लिए पांच-सूत्रीय सीजफायर योजना पेश की थी। इस योजना में तत्काल युद्धविराम, शांति वार्ता शुरू करना, हॉर्मुज स्ट्रेट में सामान्य नौवहन बहाल करना और नागरिक एवं बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना शामिल है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस अपनी ईरान के साथ रणनीतिक साझेदारी का उपयोग करके क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देना चाहता है।