
रूस-यूक्रेन युद्ध अब चौथे साल में पहुंच गया है, लेकिन शांति की उम्मीद अभी भी दूर नजर आ रही है। इस बीच, यूक्रेन ने हाल के दिनों में रूस को भारी नुकसान पहुंचाया है। यूक्रेन ने रूस के हथियार कारखाना और तेल रिफाइनरियों पर हमला करके पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
नुकसान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रूस में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो गई है। जो रूस दुनिया भर को तेल सप्लाई करता है, वह अब खुद दूसरे से तेल मंगाने की बात कर रहा है।
भारी नुकसान के बाद अब रूस यूक्रेन से समझौता करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कर दिया है कि रूस अपना रुख नहीं बदलेगा।
क्रेमलिन ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन को शांति के लिए चार इलाकों से अपनी फौज हटानी होगी और नाटो में शामिल होने का सपना छोड़ना पड़ेगा।
पुतिन ने पिछले हफ्ते टीवी इंटरव्यू में कहा कि रूस डोनेट्स्क, लुहानस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया पर पूरा कंट्रोल चाहता है। ये चारों इलाके रूस अपना हिस्सा मानता है, जबकि यूक्रेन इन्हें अपनी जमीन बताता है।
पुतिन ने यूक्रेन की नई सुझाई गई शांति पहल को ठुकरा दिया है। यूक्रेन की तरफ से प्रस्ताव था कि दोनों तरफ लंबी दूरी के हमले बंद कर दिए जाएं और लड़ाई सिर्फ इन चार इलाकों तक सीमित रखी जाए। लेकिन पुतिन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि रूस अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पत्रकारों से कहा- हमारी स्थिति जानी-पहचानी है। यह दो साल पहले विदेश मंत्रालय में राष्ट्रपति के भाषण में साफ बताई जा चुकी है। कीव, अमेरिका और सबको इसकी जानकारी है। इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।
पेसकोव ने जोर देकर कहा कि रूस की मांगें अब भी वही हैं जो 2024 में रखी गई थीं– यूक्रेन NATO से दूर रहे और चार इलाकों से अपनी सेना वापस बुलाए। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के दफ्तर की तरफ से पुतिन के बयान पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।