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फेल हुई कूटनीति तो ड्रैगन के पास जाएंगे ट्रंप? पाकिस्तान ने बिछाई ‘इस्लामाबाद राउंड-2’ की बिसात, क्या मान जाएगा ईरान?

Next Round of US-Iran Talks: अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर क्या इस्लामाबाद में होगा? पाकिस्तान की मध्यस्थता, ट्रंप की रणनीति और बढ़ते तनाव के बीच जानें क्यों अहम है सेकंड राउंड ऑफ यूएस-ईरान टॉक्स और क्या बातचीत से निकलेगा समाधान?
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Apr 14, 2026
Second Round of US-Iran Talks
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

Second Round of US-Iran Talks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक कोशिशें फिलहाल नाकाम होती दिख रही हैं। इसी बीच पाकिस्तान एक बार फिर सक्रिय हो गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही बातचीत का दूसरा दौर आयोजित किया जा सकता है, जिसकी मेजबानी इस्लामाबाद कर सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर बैकचैनल स्तर पर चर्चा जारी है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष नए सिरे से बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा रहा है और वह खुद को एक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।

क्यों फेल हुई पिछली बातचीत?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर शुरू हुई वार्ता उस वक्त अटक गई जब दोनों देश अपने-अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें रखीं, जबकि तेहरान ने इन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वाशिंगटन ने 'अंतिम और सर्वश्रेष्ठ' प्रस्ताव दिया था लेकिन ईरान के साथ सहमति नहीं बन पाई। उनका कहना था कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

ट्रंप की सख्ती और बदले हालात

वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम स्थिति को सुधारने के बजाय और जटिल बना सकता है। ऐसे में कूटनीतिक विकल्प ही आगे का रास्ता माना जा रहा है।

पाकिस्तान क्यों आया आगे?

पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में खुद को एक अहम कूटनीतिक खिलाड़ी के तौर पर पेश कर रहा है। इस्लामाबाद में संभावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान चाहता है कि बातचीत जल्द से जल्द हो ताकि क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सके। साथ ही, यह उसके लिए वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक साख मजबूत करने का भी मौका है।

क्या ड्रैगन की ओर देख रहे हैं ट्रंप?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ती है, तो चीन की भूमिका बढ़ सकती है। मई में ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा भी इस लिहाज से अहम माना जा रहा है।

हालांकि, ट्रंप ने साफ कहा है कि उन्हें बातचीत की कोई जल्दी नहीं है। उन्होंने हाल ही में कहा, ''अगर वे वापस आते हैं तो ठीक, नहीं आते तो भी मुझे फर्क नहीं पड़ता।''

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण

इस पूरे संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है। यहां बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे तेल की कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पाकिस्तान की पहल रंग लाएगी और क्या अमेरिका-ईरान एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटेंगे। आने वाले कुछ दिन इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

Updated on:
14 Apr 2026 06:05 pm
Published on:
14 Apr 2026 06:05 pm