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जलवायु परिवर्तन का खौफनाक असर, स्लोवेनिया का आखिरी ग्लेशियर खत्म होने की कगार पर, कुछ ही दिनों में पानी पर भी संकट

Slovenia climate change: स्लोवेनिया का ट्रिग्लाव ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बची हुई बर्फ भी कुछ दिनों में गायब हो सकती है।
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Oct 05, 2026
Glacier News
स्लोवेनिया का आखिरी ग्लेशियर खत्म होने की कगार पर। (फोटो- ANI)

Slovenia glacier: यूरोप में तेजी से बढ़ते तापमान का असर अब उन ग्लेशियरों पर साफ दिखाई देने लगा है, जो दशकों से पहाड़ों की पहचान और वहां के पर्यावरण का अहम हिस्सा रहे हैं।

स्लोवेनिया का ट्रिग्लाव ग्लेशियर भी अब अपने अस्तित्व के आखिरी दौर में पहुंच गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, बर्फ के बचे हुए छोटे-छोटे हिस्से भी अगले कुछ दिनों में पूरी तरह गायब हो सकते हैं।

कभी 14 हेक्टेयर में फैला था ग्लेशियर

ट्रिग्लाव ग्लेशियर स्लोवेनिया के सबसे ऊंचे पर्वत ट्रिग्लाव के नीचे स्थित है। कभी यह इलाका गर्मियों में स्कीइंग के लिए भी जाना जाता था और कई पीढ़ियों से इसे देश की पहाड़ी विरासत का प्रतीक माना जाता रहा है।

शोधकर्ताओं ने 1946 से इस ग्लेशियर पर नजर रखी है। उस समय इसका क्षेत्र करीब 14 हेक्टेयर था। लेकिन दशकों में इसका आकार लगातार घटता गया। अब हालात इतने खराब हैं कि इसे सामान्य अर्थों में सक्रिय ग्लेशियर कहना भी मुश्किल हो गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्लेशियर में अब नई बर्फ जुड़कर नीचे की ओर बहने वाली बर्फ की परत नहीं बन रही है। इसका मतलब है कि यह लगभग अपना ग्लेशियर वाला स्वरूप खो चुका है।

कुछ दिनों की मेहमान है बची हुई बर्फ

स्लोवेनिया के रिसर्च सेंटर ऑफ द स्लोवेनियन एकेडमी ऑफ साइंसेज एंड आर्ट्स के एंटोन मेलिक जियोग्राफिकल इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता मिहा पावशेक पिछले करीब 30 साल से इस ग्लेशियर की निगरानी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए बर्फ के आखिरी टुकड़े भी आने वाले दिनों में गायब हो सकते हैं। पावशेक के लिए यह सिर्फ एक वैज्ञानिक अध्ययन का अंत नहीं, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे एक प्राकृतिक बदलाव का बेहद दुखद पड़ाव है।

कम बर्फबारी ने बढ़ाई मुश्किल

ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के पीछे इस साल की सर्दियों का मौसम भी बड़ी वजह बना। पिछले सर्दी के मौसम में यहां सामान्य से कम बर्फबारी हुई। इसके बाद जमा हुई बर्फ भी सामान्य से काफी पहले पिघल गई।

इसका सीधा असर बची हुई पुरानी बर्फ पर पड़ा। गर्मियों की धूप और बढ़ते तापमान के बीच यह बर्फ लंबे समय तक खुली रही। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब पहाड़ की छायादार और अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह भी ग्लेशियर के बचे हिस्से को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

पूरे यूरोप में ग्लेशियरों पर संकट

ट्रिग्लाव की कहानी अकेली नहीं है। यूरोप किसी भी दूसरे महाद्वीप की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है और इसका असर पूरे महाद्वीप के ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। कई जगहों पर बर्फ की मोटी परत लगातार पतली हो रही है और ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं।

स्लोवेनिया के लिए इसका असर सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रह सकता। पावशेक के मुताबिक, पड़ोसी ऑस्ट्रिया के ग्लेशियरों के खत्म होने से आगे चलकर द्रावा और मुरा नदी घाटियों में पानी का प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। इन नदियों का पानी स्लोवेनिया के कई कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है।

सिर्फ बर्फ का पिघलना नहीं, बड़े बदलाव का संकेत

ट्रिग्लाव ग्लेशियर का खत्म होना पर्यावरण के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। जलवायु परिवर्तन का असर अब दूर-दराज के बर्फीले पहाड़ों तक सीमित नहीं है।

ग्लेशियरों का सिकुड़ना आने वाले समय में पानी, खेती और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी असर डाल सकता है। खासक्र पानी का संकट बढ़ने का अनुमान है।

Updated on:
05 Oct 2026 05:58 pm
Published on:
05 Oct 2026 05:57 pm