Sri Lankan Supreme Court Order: श्रीलंका में सुप्रीम कोर्ट ने तमिल भूमि के विषय में एक बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले से बड़ी संख्या में तमिल लोगों को राहत मिली है।
श्रीलंका (Sri Lanka) के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को सरकार की उस योजना पर रोक लगा दी, जिसके तहत तमिल बहुल उत्तर क्षेत्र की लगभग 6,000 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा था। सरकार तमिलों की इस भूमि (Tamil Land) को हड़पना चाहती थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने श्रीलंकाई सरकार को बड़ा झटका दे दिया है और सरकारी योजना को भी अधरझूल में लटका दिया है।
श्रीलंकाई सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क के दौरे के एक दिन बाद आया है, जिन्होंने श्रीलंका में सेना के कब्ज़े वाली उन जमीनों को लौटाने की अपील की थी जो तमिलों की हैं।
पूर्व तमिल सांसद एमए सुमंथिरन ने कोर्ट में याचिका दायर कर इसे 'जमीन हड़पना' बताया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले अधिग्रहण न करने का आश्वासन दिया था लेकिन इस आश्वासन को पूरा नहीं किया। सुमंथिरन ने दावा किया है कि अब भी जाफना में सेना ने तमिलों की करीब 3,000 एकड़ ज़मीन पर कब्ज़ा बनाया हुआ है।
उत्तर श्रीलंका के जाफना और आस-पास के इलाके दशकों तक चले तमिल अलगाववादी संघर्ष के केंद्र रहे हैं, जिसका अंत 2009 में हुआ था। इस दौरान लाखों तमिल विस्थापित हुए, हज़ारों की जमीनों के दस्तावेज खो गए और 2004 की सुनामी ने हालात और खराब किए। यूएन के अनुमान के मुताबिक युद्ध में एक लाख लोगों की मौत हुई थी। अंतिम महीनों में मारे गए करीब 40,000 तमिल नागरिक श्रीलंकाई सेना की कार्रवाई में मारे गए बताए जाते हैं। तुर्क ने युद्ध अपराधों की जांच और दोषियों को सजा देने की मांग की है।