Switzerland cash payment vote: स्विस नेशनल बैंक(एसएनबी) की ओर से हाल में की गई एक स्टडी में पता चला कि 2017 में जहां 10 में से 7 लोग रेस्टोरेंट, दुकानों या कियॉस्क पर कैश में भुगतान करते थे।
Switzerland cash payment vote: यूरोपीय के सबसे समृद्ध देशों में से एक स्विट्जरलैंड में रविवार को लोग मतदान करेंगे। यह वोटिंग इसलिए होगी ताकि देश में नकद भुगतान करने की व्यवस्था को संविधान के दायरे में लाकर बचाया जा सके। लगातार बढ़ते डिजिटल पेमेंट के चलन के बीच नकद लेनदेन की सुविधा को बनाए रखने के लिए स्विट्जरलैंड में बड़ा अभियान चल रहा है। यह वहां एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी है।
स्विस नेशनल बैंक(एसएनबी) की ओर से हाल में की गई एक स्टडी में पता चला कि 2017 में जहां 10 में से 7 लोग रेस्टोरेंट, दुकानों या कियॉस्क पर कैश में भुगतान करते थे। 2024 में अब 10 में से महज 3 लोग ही कैश पेमेंट करते हैं। वहीं 15 से 34 वर्ष की आयुवर्ग में 10 में से सिर्फ दो लोग ही नकद भुगतान करते हैं। डेबिट,क्रेडिट कार्ड और पेमेंट एप खासकर जिसमें स्विस पेमेंट एप का प्रयोग काफी बढ़ा है।
हालांकि लगातार कैश पेमेंट का चलन कम हुआ है,लेकिन एसएनबी के अनुसार नकद भुगतान के विकल्प को बचाए रखना चाहते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट गैलन ने 2025 में एक स्टडी की जिसमें पता चला कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण नकद का चलन बढ़ रहा है। सर्वे में 10 में से 9 लोगों ने कैश को खत्म करने का विरोध किया।
स्विट्जरलैंड में रविवार को होने वाली वोटिंग में लोग यह तय करेंगे कि संविधान में उन्हें नोट और सिक्कों की उपलब्धता को लेकर गारंटी मिले। वोटिंग में पहले उन्हें हां या नहीं का विकल्प चुनना होगा। उसके बाद उन्हें एक और प्रश्र का जवाब देना होगा कि कैश और डिजिटल पेमेंट दोनों विकल्प स्वीकार किए जाते हैं तो वह कौन सा विकल्प चुनेंगे।
कैश इज फ्रीडम अभियान को 2023 में नागरिकों की ओर से ही शुरू किया गया था। इसका संचालन अब 'स्विस फ्रीडम मूवमेंट' नाम की संस्था कर रही है। इससे पहले 2024 में इसने अनिवार्य टीकाकरण के विरुद्ध पहल की थी जिसे खारिज कर दिया गया था। वहीं कैश इनीशिएटिव में अब तक 1.37 लाख लोगों ने अपने हस्ताक्षर कर इसे समर्थन दिया है। इस संस्था के अध्यक्ष रिचर्ड कोहलर के अनुसार नकद राशि स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करती है। यह डिजिटल पेमेंट के जरिए हमारे खर्चों पर होने वाली स्थायी निगरानी से हमें बचाती है। इंटरनेट फेल होने,हैकिंग के खतरों से भी बचाती है।