
चीन को ताइवान ने खुली चेतावनी दी है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने रविवार को अपनी पार्टी की बैठक में साफ कहा कि लोकतांत्रिक ताइवान कभी भी चीन का हिस्सा नहीं बनेगा।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मिलकर चीन की 'रेड टेरर' का मुकाबला करें और अपनी आजादी व लोकतंत्र की रक्षा करें।
राष्ट्रपति लाई ने कहा कि शांति के समय में भी हमें सतर्क रहना होगा। चीन अब 'कानूनी युद्ध' लड़ रहा है। हाल ही में चीन ने नया कानून बनाया है, जिसके तहत वह अपने बाहर रहने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है।
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा- हम सब को एकजुट होकर चीन की रेड टेरर से ताइवान की समाज की रक्षा करनी होगी। हम अपनी लोकतांत्रिक और आजाद जीवनशैली को बचाए रखेंगे। कभी भी लोकतांत्रिक ताइवान को चीन का गुलाम नहीं बनने देंगे।
लाई चिंग-ते, जो डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के चेयरमैन भी हैं, उन्होंने फिर दोहराया कि ताइवान पहले से ही एक स्वतंत्र देश है। इसका संवैधानिक नाम रिपब्लिक ऑफ चाइना है और यह चीन के अधीन नहीं है।
उन्होंने कहा- चाहे कोई कितना भी पुराना निवासी हो या नया, जो ताइवान को अपना मानता है, वही इस देश का मालिक है। ताइवान का भविष्य 2 करोड़ 30 लाख ताइवानी लोग ही तय करेंगे।
1949 में गृहयुद्ध हारने के बाद च्यांग काई-शेक की सरकार ताइवान भाग आई थी। तब से दोनों तरफ कोई शांति संधि नहीं हुई है। चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है, जबकि ताइवान अपनी अलग पहचान पर जोर देता है।
पिछले दस साल में डीपीपी सरकार के दौरान ताइवान ने चीन की सैन्य धमकियों, झूठी खबरों, कूटनीतिक दबाव और विस्तारवादी नीतियों का डटकर सामना किया है।
राष्ट्रपति लाई ने कहा- ताइवान ने दुनिया को दिखा दिया है कि लोकतंत्र कमजोरी नहीं, ताकतवर है। पार्टी की सालाना बैठक में लाई ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे मोर्चे पर खड़े रहें। उन्होंने मंदारिन की बजाय स्थानीय ताइवानी भाषा (होक्कियन) में भाषण दिया, जो लोगों से सीधा जुड़ाव दिखाता है।
बता दें कि ताइवान को लेकर चीन ने एक नया कानून बनाया है, जो उसकी संस्कृति और भाषा पर सीधा प्रहार है। इसको लेकर ताइवान ने चीन को खुली चेतावनी दी है।