Tanker War: होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के हमलों से टैंकर युद्ध जैसी स्थिति बनी है। 1980 के दशक की तरह अमेरिका टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसेना भेज रहा है, तेल कीमतें आसमान छू रही हैं।
Tanker War: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से रोजाना दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल (Tanker War) गुजरता है। मार्च 2026 में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे (Iran Conflict) तनाव के कारण यहां फिर से टैंकर युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान ऐसा ही हुआ था, जब दोनों देशों ने एक-दूसरे के तेल टैंकरों (Oil Tankers)पर हमले किए थे। अब इतिहास दोहराया जा रहा है, जहां ईरान ने कई विदेशी टैंकरों पर हमले किए हैं और अमेरिका नौसेना से टैंकरों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट ( US Navy Escorts)भेजने की योजना बना रहा है।
1980 में इराक के सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया था। युद्ध लंबा खिंच गया तो 1984 से इराक ने ईरान के तेल टैंकरों पर हमले शुरू किए। ईरान ने जवाब में तटस्थ देशों के जहाजों पर हमला किया, खासकर वे जो इराक को सप्लाई दे रहे थे। अमेरिका ने 1987 में कुवैत के टैंकरों को अपनी ध्वज में बदलकर उनकी सुरक्षा की, जिसे ऑपरेशन अर्नेस्ट विल कहा गया। इस दौरान कई घटनाएं हुईं, जैसे USS स्टार्क पर गलती से हमला, जहां 37 अमेरिकी नौसैनिक मारे गए। ईरान ने माइंस बिछाए, जिससे कई जहाज क्षतिग्रस्त हुए।
1987 में ब्रिजटन टैंकर माइन से टकराया। 1988 में USS सन सैमुअल बी. रॉबर्ट्स माइन हिट होने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ, जिसके बाद अमेरिका ने ऑपरेशन प्रेयिंग मैंटिस चलाया और ईरानी जहाजों व प्लेटफॉर्म को नष्ट किया। इन घटनाओं से पता चला कि युद्ध में छोटी गलतियां भी बड़े नुकसान पहुंचा सकती हैं। माइंस का खतरा आज भी बना हुआ है, जो जहाजों की आवाजाही को रोक सकता है।
अब 2026 में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में माइंस बिछाए हैं और कई तेल टैंकरों पर हमले किए हैं, जिससे जहाज रुके हुए हैं। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने सहयोगियों से माइंसवीपर मांगें हैं, लेकिन अमेरिका के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ईरान के पास ड्रोन और मिसाइल जैसे नए हथियार हैं, जो खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
यह स्थिति तेजी से बढ़ सकती है। अगर स्ट्रेट बंद हुआ तो दुनिया का तेल सप्लाई प्रभावित होगा, कीमतें और बढ़ेंगी। इतिहास बताता है कि ऐसे युद्ध में गलतियां महंगी पड़ती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एस्कॉर्ट से ज्यादा माइंस क्लियर करना जरूरी है, लेकिन यह धीमी प्रक्रिया है।