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आतंकी भी कर रहे एआई का इस्तेमाल, चैटबॉट्स का इस्तेमाल करके बना रहे बम

Terrorists Using AI Chatbots: आतंकी भी अब एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। किस काम में आतंकी इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं? आइए नज़र डालते हैं।
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Jul 14, 2026
AI
आतंकी भी कर रहे हैं एआई का इस्तेमाल (Representational Photo)

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) का इस्तेमाल कई सेक्टर्स में होने लगा है। हालांकि इस तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ अच्छे काम के लिए नहीं, बल्कि गलत कामों के लिए भी हो रहा है। अब आतंकी (Terrorists) भी एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। एआई चैटबॉट्स अब सिर्फ इंटरनेट पर चरमपंथी प्रोपेगैंडा फैलाने का ज़रिया नहीं रहे। हाल ही में एक चौंकाने वाली स्टडी में सामने आया है कि अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) और बोको हराम जैसे खूंखार आतंकी संगठन अब बम बनाने, हथियारों को अपग्रेड करने और हमलों की सटीक प्लानिंग के लिए एआई चैटबॉट्स और अन्य एआई टूल्स का सीधा इस्तेमाल कर रहे हैं।

डिजिटल न्यूक्लियर वेपन

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने आतंकी संगठनों के इस नए हथकंडे को 'डिजिटल न्यूक्लियर वेपन' करार दिया है। वहीं शोधकर्ता डॉ. जूलिश ने चेतावनी दी है कि आतंकी इस बात का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं कि एआई को सुरक्षित बनाया जाए, बल्कि वो इस तकनीक का इस्तेमाल अपने गलत मंसूबों के लिए कर रहे हैं।

पूर्व कमांडरों ने खोला 'ट्रेनिंग' का राज

शोधकर्ता डॉ. जूलिश द्वारा की गई इस स्टडी के निष्कर्ष बोको हराम के 27 पूर्व आतंकियों और कमांडरों के इंटरव्यू पर आधारित हैं। एक पूर्व आईएसआईएस कमांडर ने बताया, "एआई एक इंसानी रोबोट की तरह है। आप बस टाइप करो या आवाज़ दो कि 'बम कैसे बनाएं?' और यह पूरी विधि बता देता है। हमने इसका खूब इस्तेमाल किया।"

सुरक्षा फिल्टर को तोड़ने की दी जा रही ट्रेनिंग

आतंकियों को बकायदा लैपटॉप, वीपीएन और एन्क्रिप्टेड सॉफ्टवेयर के ज़रिए एआई चैटबॉट्स के सुरक्षा फ़िल्टर को तोड़ना और सही तरीके से प्रॉम्प्ट देना सिखाया जा रहा है। यह इसलिए किया जा रहा है जिससे उन्हें अपने काम में कोई परेशानी न आए।

3D-प्रिंटेड हथियार और ड्रोन बनाने में मदद

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के अनुसार आतंकी एआई का इस्तेमाल करके सिर्फ जानकारी ही नहीं ले रहे, बल्कि चैटबॉट्स की मदद से बम, ड्रोन के पुर्जे, 3D-प्रिंटेड वेपन पार्ट्स और गोला-बारूद के कंपोनेंट्स भी डिज़ाइन कर रहे हैं। आतंकी किसी एक टूल पर निर्भर नहीं हैं। वो सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए चैटजीपीटी, जैमिनी, ग्रोक और डीपसीक जैसे अलग-अलग एआई प्लेटफॉर्म्स का बारी-बारी से इस्तेमाल कर रहे हैं।

यूरोप में सामने आया मामला

यह खतरा सिर्फ कागजी नहीं है। मई में पेरिस में एक म्यूज़ियम और यहूदी स्थल पर हमले की साजिश रचने के आरोप में एक 27 वर्षीय ट्यूनीशियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि उसने हमले का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए एआई की मदद ली थी।