डिशनल कमिश्नर एसएन नजरुल इस्लाम ने कहा कि हादी की हत्या के संदिग्ध फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख हलुआघाट बॉर्डर के रास्ते भारत भाग गए हैं और लोकल साथियों की मदद से मेघालय पहुंच गए हैं।
Usman Hadi Killing Case: बांग्लादेश में छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। द डेली स्टार ने ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) के हवाले से जानकारी दी है कि उस्मान हादी की हत्या के दो मुख्य संदिग्ध देश के मयमनसिंह शहर में हलुआघाट सीमा के रास्ते भारत भाग गए और मेघालय में घुस गए।
DMP मीडिया सेंटर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडिशनल कमिश्नर एसएन नजरुल इस्लाम ने कहा कि हादी की हत्या के संदिग्ध फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख हलुआघाट बॉर्डर के रास्ते भारत भाग गए हैं और लोकल साथियों की मदद से मेघालय पहुंच गए हैं।
अधिकारी ने बताया कि हमारी जानकारी के अनुसार बॉर्डर पार करने के बाद दोनों संदिग्ध को शुरू में पूर्ति नाम के व्यक्ति ने रिसीव किया। बाद में, सामी नाम के एक टैक्सी ड्राइवर ने उन्हें मेघालय के तुरा शहर पहुंचाया।
अधिकारी ने यह भी कहा कि जिन दो लोगों ने संदिग्धों को मेघालय में घुसने में मदद की थी, उन्हें अब भारत में हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने आगे कहा, “हम उनकी गिरफ्तारी और एक्सट्रैडिशन पक्का करने के लिए फॉर्मल और इनफॉर्मल दोनों तरीकों से भारतीय अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं।”
बता दें कि 12 दिसंबर को सेंट्रल ढाका के बिजॉयनगर इलाके में उस्मान हादी को गोली मारी गई थी, इसके बाद उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां 18 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादी की मौत के बाद देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई।
उस्मान हादी के जनाजे में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और न्याय का भरोसा दिलाया। इसके अलावा अभी तक यूनुस सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाने के बाद उस्मान हादी के भाई ने चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि यदि हमें न्याय नहीं मिला तो हम यूनुस के आवास का घेराव करेंगे।
बता दें कि उस्मान हादी शेख हसीना के खिलाफ बने इंकलाब मंच का हिस्सा थे। वह फरवरी में होने वाले चुनावों में भी उम्मीदवार थे और जब हमला हुआ, तब वह ढाका-8 चुनाव क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर प्रचार कर रहे थे। पिछले साल जुलाई में बांग्लादेश में हुए विद्रोह के दौरान इंकलाब मंच सुर्खियों में रहा था, जिसके कारण आखिरकार हसीना को हटा दिया गया।