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नेतन्याहू को बड़ा झटका: यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म ने किसी भी PM उम्मीदवार का समर्थन करने से किया इनकार

Israel politics: इजरायल की अति-रूढ़िवादी पार्टी यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म ने राष्ट्रपति हर्ज़ोग से परामर्श में किसी भी PM उम्मीदवार को समर्थन न देने का फैसला किया। नेतन्याहू को भी झटका।
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Updated: 5 Nov 2026, 3:23 PM IST
Israel Politics
राष्ट्रपति हर्जोग से यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म पार्टी प्रति​निधियों ने की चर्चा, Photo- ANI

Israeli Political Crisis: इजरायल में अति-रूढ़िवादी 'यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म' पार्टी ने अपनी पारंपरिक राजनीतिक स्थिति से हटते हुए, इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ परामर्श के दौरान प्रधानमंत्री पद के लिए किसी भी उम्मीदवार का समर्थन न करने का फैसला किया है। इस तरह, उन्होंने अपने पुराने सहयोगी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी समर्थन देने से इनकार कर दिया है।

यह बड़ा राजनीतिक बदलाव, सात सीटों वाली इस पार्टी के दोनों गुटों—'देगेल हातोराह' (जिसके पास चार सीटें हैं और जो लिथुआनियाई अति-रूढ़िवादी यहूदियों का प्रतिनिधित्व करता है) और 'अगुदात यिसराएल' (जिसके पास तीन सीटें हैं और जो हसीदिक अति-रूढ़िवादी यहूदियों का प्रतिनिधित्व करता है)—को उनके आध्यात्मिक नेताओं द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद आया है। इन नेताओं ने उन्हें किसी भी उम्मीदवार का समर्थन न करने का निर्देश दिया था।

आइसेनकोट की स्थिति मजबूत

इस कदम से 'यशार' (Yashar) पार्टी के नेता गादी आइसेनकोट सिफारिशों की गिनती में एक मजबूत स्थिति में आ गए हैं। 'राआम' (Ra’am) पार्टी द्वारा अपने आठ सांसदों के साथ आइसेनकोट का समर्थन करने की घोषणा के बाद, उन्हें कुल 56 संसदीय समर्थन मिल गए हैं। वहीं, नेतन्याहू के पास फिलहाल 46 समर्थन हैं। अब राष्ट्रपति को यह तय करना है कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए।

इस घटनाक्रम के पीछे पिछले हफ्ते की कुछ रिपोर्टें हैं, जिनमें कहा गया था कि यह गुट आइसेनकोट के नेतृत्व वाली एक अल्पसंख्यक सरकार को बाहर से समर्थन देने पर विचार कर रहा था। ऐसा नेतन्याहू से बढ़ती नाराजगी के कारण हो रहा है, क्योंकि 'येशिवा' (धार्मिक स्कूल) के छात्रों को सैन्य सेवा से छूट दिलाने वाले कानून को पारित करने के प्रयास अटके हुए हैं।

'हारेदी' पार्टियों के सहयोग की संभावना

'द टाइम्स ऑफ इजरायल' के अनुसार, राष्ट्रपति भवन से लाइव प्रसारित हो रही इन महत्वपूर्ण राजनीतिक चर्चाओं के दूसरे दिन, पार्टी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की किसी भी सरकार को उनका समर्थन पूरी तरह से इस शर्त पर निर्भर करेगा कि सैन्य सेवा से छूट देने वाले कानून लागू किए जाएं।

हालांकि, यह एक ऐसी शर्त है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इससे आइसेनकोट और उनके सहयोगियों के साथ गठबंधन करने में एक बड़ी बाधा खड़ी हो गई है, क्योंकि वे हमेशा से सभी के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा को प्राथमिकता देते रहे हैं। फिर भी, उस गुट के कुछ प्रमुख नेताओं ने हाल ही में 'हारेदी' (अति-रूढ़िवादी) पार्टियों के साथ सहयोग करने की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है।

Updated on:
5 Nov 2026, 3:23 PM IST
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