
Iran-US Conflict: ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताह ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध के दौरान मारे गए दो सैनिकों की पहचान की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बीते शनिवार को ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में जॉर्डन में दो सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी। अमेरिकी सेना ने ईरान के साथ युद्ध में मरने वालों की कुल संख्या 17 बताई है।
रक्षा विभाग ने एक बयान में कहा कि हवाई के एवा बीच के रहने वाले 25 साल के फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहन और टेक्सास के कैरोलटन की रहने वाली 19 साल की प्राइवेट इसाबेला गोंजालेज जॉर्डन में मारे गए, जहां वे इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिकी मिशन में मदद कर रहे थे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि दोनों सैनिकों की मौत का स्पष्ट कारण क्या रहा।
28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के कुछ ही समय बाद, कुवैत में आम लोगों के इस्तेमाल वाले एक बंदरगाह पर ईरानी ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए। ये सैनिक आयोवा में स्थित एक सप्लाई और लॉजिस्टिक्स यूनिट का हिस्सा थे और शिपिंग कंटेनर जैसी एक ऐसी इमारत में काम कर रहे थे, जहाँ सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं था। एक सातवें सैनिक की मौत सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के 1 मार्च के हमले में घायल होने के बाद हुई।
मार्च में, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद करने वाला KC-135 रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट इराक में क्रैश होने से छह सर्विस मेंबर मारे गए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, एयरक्राफ्ट फ्रेंडली एयरस्पेस में था।
सोमवार को अमेरिकी सेना ने बताया कि अरब सागर में एक हेलीकॉप्टर क्रैश में नेवी के एक पायलट की मौत हो गई। नेवी ने शुरू में 1 जुलाई की इस घटना को इमरजेंसी लैंडिंग बताया था और कहा था कि, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि इमरजेंसी किसी दुश्मन की कार्रवाई के कारण हुई थी। हेलीकॉप्टर में सवार बाकी तीन नाविकों को बचा लिया गया।
ईरान के अधिकारियों के अनुसार, पिछले तीन सप्ताह में अमेरिकी हमलों में कम से कम 50 लोग मारे गए हैं और 500 से ज्यादा घायल हुए हैं। इनमें तीन दिन पहले एक पुल पर हुए हमले में मारे गए आठ लोग भी शामिल हैं।