US Visa Halt: पाकिस्तान के कराची में उग्र भीड़ ने अमेरिकी दूतावास पर हमला करने से शहबाज सरकार और सेना की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। इसके जवाब में अमेरिका ने सख्त एक्शन लेते हुए पाकिस्तान में अपनी वीजा सेवाएं रोक दी हैं।
Karachi Protest : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा की बात आई, तो पाकिस्तान का पूरा सुरक्षा तंत्र बुरी तरह विफल साबित हुआ। हाल ही में कराची स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (US Embassy Karachi) पर एक बड़ा और हिंसक हमला हुआ। यह घटना तब हुई जब ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों (जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई की जान गई, उसके विरोध में पाकिस्तान की जनता सड़कों पर उतर आई। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस कदर भड़का कि वे पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर अमेरिकी दूतावास की बाहरी दीवार फांद गए। शहबाज सरकार और जनरल मुनीर की पुलिस मूकदर्शक बनी रही और उग्र भीड़ को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही (Pakistan US relations)। ध्यान रहे कि आपरेशन सिंदूर से पहले ट्रंप ने मुनीर को अमेरिका बुलाया था और दोनों में मंत्रणा हुई थी।
हालात इतने बेकाबू हो गए कि दूतावास के अंदर मौजूद अमेरिकी मरीन कमांडो को अपनी जान और राजनयिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए खुद फायरिंग करनी पड़ी। इस हिंसक घटना में कई प्रदर्शनकारियों की जान चली गई और दर्जनों घायल हो गए। इस वाकये ने साफ कर दिया है कि भले ही पाकिस्तानी हुक्मरान अमेरिका के आगे-पीछे घूम रहे हों, लेकिन वे अपने ही देश में अमेरिकी ठिकानों को सुरक्षा देने में सक्षम नहीं हैं।
ट्रंप से अच्छे रिश्तों की उम्मीद लगाए बैठे शहबाज और मुनीर के लिए यह एक बहुत बड़ा कूटनीतिक झटका है। एक तरफ वे अमेरिका से आर्थिक मदद और समर्थन की आस में थे, वहीं दूसरी तरफ इस घटना ने ट्रंप प्रशासन की नजरों में पाकिस्तान की कानून व्यवस्था और सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। इस गंभीर घटना पर कड़ा एक्शन लेते हुए अमेरिका ने पाकिस्तान में अपनी वीजा सेवाओं पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, अमेरिका ने अपने गैर-जरूरी राजनयिक स्टाफ और उनके परिवारों को सुरक्षा कारणों से कराची और लाहौर छोड़ने का आदेश दे दिया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की अवाम में अपनी ही सरकार और अमेरिका के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोग शहबाज और मुनीर पर अमेरिका की कठपुतली होने का आरोप लगा रहे हैं।
इस हिंसक घटना के बाद पाकिस्तान सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर है। पूरे देश में बड़े सार्वजनिक जमावड़ों और रैलियों पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई है। इस्लामाबाद स्थित मुख्य अमेरिकी दूतावास सहित लाहौर और पेशावर के वाणिज्य दूतावासों के बाहर भारी पुलिस बल और सेना तैनात कर दी गई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान के लिए 'लेवल 3' ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों को वहां सतर्क रहने और भीड़भाड़ से बचने की सख्त हिदायत दी है।
बहरहाल,इस पूरे मामले का एक अहम पहलू पाकिस्तान की विदेशी मजबूरियों और घरेलू जनता के मूड के बीच का सीधा टकराव है। शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए किसी भी कीमत पर डोनाल्ड ट्रंप का साथ चाहते हैं। लेकिन पाकिस्तान की बहुसंख्यक जनता ईरान के समर्थन में खड़ी है और अमेरिका का कड़ा विरोध कर रही है। ऐसे में पाकिस्तानी हाइब्रिड सरकार के लिए अमेरिका से दोस्ती और अपने ही देश की जनता के गुस्से के बीच संतुलन बिठाना लगभग नामुमकिन हो गया है।