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क्या UAE ने राजनीतिक दुश्मनों को खत्म करने के लिए पूर्व अमेरिकी सैनिकों को दी थी सुपारी ? खौफनाक रिपोर्ट ने दुनिया को चौंकाया!

Mercenaries: पूर्व अमेरिकी सैनिकों पर यूनाइटेड अरब अमीरात के लिए यमन में एक सीक्रेट 'असासिनेशन स्क्वाड' चलाने का गंभीर आरोप लगा है। इन आतंकवादियों को यमन के राजनेताओं और विरोधियों की हत्या के लिए करोड़ों रुपये दिए जाते थे, जिसका खुलासा अदालत में हुआ है।

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Apr 03, 2026
स्पीयर ऑपरेशंस के संस्थापक सदस्य अब्राहम गोलन और इसहाक गिलमोर। (फोटो: X @Neslihan662)

UAE: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक नई विस्तृत रिपोर्ट और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की अदालत में दायर किए गए मुकदमे से यह बात सामने आई है कि पूर्व अमेरिकी सैनिकों ने यमन में यूनाइटेड अरब अमीरात के लिए एक गुप्त हत्या दस्ते का संचालन किया था। इस दस्ते का मुख्य काम यमन में यूनाइटेड अरब अमीरात के राजनीतिक विरोधियों को रास्ते से हटाना था। यह खुलासा न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय युद्ध के नियमों पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि दूसरे देशों में भाड़े के सैनिकों के इस्तेमाल को लेकर भी एक नई बहस छेड़ चुका है।

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करोड़ों रुपये और बोनस का था करार

प्राप्त जानकारी और अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 2015 में यमन युद्ध के शुरुआती दौर में 'स्पियर ऑपरेशंस ग्रुप' नाम की एक अमेरिकी प्राइवेट मिलिट्री कंपनी को इस काम का जिम्मा सौंपा गया था। इस कंपनी की स्थापना अब्राहम गोलान ने की थी। आरोप है कि यूनाइटेड अरब अमीरात की सरकार ने इस कंपनी को हर महीने 1.5 मिलियन डॉलर (लगभग 12.5 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम भुगतान किया। इसके अलावा, किसी भी सफल हत्या (टारगेट किलिंग) को अंजाम देने पर इन पूर्व सैनिकों को अलग से तगड़ा बोनस भी दिया जाता था। इस दस्ते में मुख्य रूप से यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की स्पेशल फोर्सेस और नेवी सील के पूर्व प्रशिक्षित जवान शामिल थे, जिन्होंने पैसों के लालच में इस खतरनाक मिशन को अंजाम दिया।

यमन के सांसद ने दर्ज कराया मुकदमा

यह पूरा मामला तब और खुलकर सामने आया जब यमन के एक जाने-माने राजनेता और सांसद अंसफ अली मायो ने हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की एक संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया। अपनी याचिका में उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि 2015 में स्पियर ऑपरेशंस ग्रुप के इन्हीं भाड़े के सैनिकों ने उनकी हत्या की कोशिश की थी। अंसफ अली मायो ने इस घटना को सीधे तौर पर युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है।

अल-इस्लाह' के नेताओं को खत्म करने के टारगेट दिए जाते थे

इस मुकदमे में स्पियर ऑपरेशंस ग्रुप के संस्थापक अब्राहम गोलान के साथ-साथ पूर्व अमेरिकी नेवी सील इसाक गिल्मोर और पूर्व स्पेशल फोर्सेज के जवान डेल कॉमस्टॉक को भी नामजद किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की एक डॉक्युमेंट्री में इसाक गिल्मोर और डेल कॉमस्टॉक जैसे पूर्व सैनिकों ने कैमरे पर यह बात मानी है कि उन्हें यूनाइटेड अरब अमीरात की तरफ से राजनीतिक पार्टी 'अल-इस्लाह' के नेताओं को खत्म करने के टारगेट दिए जाते थे।

अपने युद्ध कौशल का एक हत्यारे दस्ते के रूप में इस्तेमाल किया

इस बड़े खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सेंटर फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी की प्रतिनिधि एला मैथ्यूज ने कड़े शब्दों में कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन सैनिकों को अमेरिकी करदाताओं के पैसों से दुनिया की सबसे बेहतरीन ट्रेनिंग मिली, उन्होंने अपने युद्ध कौशल का इस्तेमाल एक हत्यारे दस्ते के रूप में किया। वहीं, यमन के सांसद अंसफ अली मायो ने कहा कि उन्हें इस बात पर गहरा धक्का लगा कि एक बाहरी देश ने उनके ही मुल्क में उन्हें जान से मारने के लिए भाड़े के विदेशी हत्यारे भेजे।

इस सीक्रेट किलिंग प्रोग्राम के बारे में पहले से कोई जानकारी थी

इस खबर के सामने आने के बाद अब दुनिया भर की नजरें यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के रक्षा विभाग और खुफिया एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं। अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर सकते हैं कि क्या अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस सीक्रेट किलिंग प्रोग्राम की पहले से कोई जानकारी थी। अदालत में दायर मुकदमे की अगली सुनवाई में कुछ और बड़े राजनेताओं या अधिकारियों के नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही, स्पियर ऑपरेशंस ग्रुप से जुड़े अन्य पूर्व कर्मचारियों को भी कानूनी दायरे में लाया जा सकता है।

मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन

इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा और बेहद चिंताजनक पहलू यह है कि जब शक्तिशाली देश युद्ध में सीधे अपनी सेना उतारने से बचते हैं, तो वे स्पियर ऑपरेशंस ग्रुप जैसी प्राइवेट मिलिट्री कंपनियों का सहारा लेते हैं। यूनाइटेड अरब अमीरात का यह कदम मध्य पूर्व में अपना प्रभुत्व और सत्ता कायम करने की एक खतरनाक कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानूनों की भारी कमियों को उजागर करती है, जहां प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स बिना किसी स्पष्ट जवाबदेही के संप्रभु राष्ट्रों में सैन्य ऑपरेशनों को अंजाम देते हैं और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करते हैं।

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