US Iran Ceasefire: अमेरिका-ईरान सीजफायर पर ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए 100 प्रतिशत पूरी जीत बताया है।
US Iran Ceasefire: मिडिल ईस्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने वैश्विक राजनीति और सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया था। लेकिन अब लंबे समय और भारी विवाद के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान सीजफायर के लिए तैयार हो गए है। बुधवार तड़के सुबह (भारतीय समयानुसार) इस युद्धविराम की घोषणा हुई जिसके बाद वैश्विक राजनीति में आई अशांति में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इस सीजफायर को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने इस ईरानी समझौते को अमेरिका के लिए पूरी और अंतिम जीत बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस समझौते के बाद अमेरिका ने अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा के बाद एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि यह समझौता अमेरिका के लिए 100 प्रतिशत जीत है। ट्रंप का दावा है कि इस डील के तहत ईरान के समृद्ध यूरेनियम को पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा, जो इस पूरे विवाद का सबसे अहम मुद्दा रहा है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यूरेनियम के साथ वास्तव में क्या किया जाएगा।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि यह समझौता टूटता है तो अमेरिका अपने पुराने सख्त रुख पर लौट सकता है, जिसमें ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर कार्रवाई की धमकी शामिल थी। यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे रहा है। बता दें कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि ईरान कभी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। इसी कारण यह सीजफायर समझौता केवल सैन्य तनाव कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध परमाणु नियंत्रण से भी है।
ट्रंप के अनुसार, अगर यूरेनियम की स्थिति संतोषजनक नहीं होती तो वह इस डील को स्वीकार ही नहीं करते। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता अस्थायी राहत जरूर दे सकता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए और ठोस कदम जरूरी होंगे। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि चीन ने ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि बीजिंग ने इस प्रक्रिया में सहयोग किया। गौरतलब है कि ट्रंप जल्द ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के लिए बीजिंग जाने वाले हैं। ऐसे में यह मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत का अहम हिस्सा बन सकता है।