
Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ दो महीने पुराना युद्धविराम अब पूरी तरह टूट चुका है। दोनों देशों ने लगातार दूसरे दिन एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान में बड़े हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।
इस भीषण सैन्य टकराव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को बंद करने का दावा किया है, जिससे वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2% उछल कर 95 डॉलर प्रति बैरल यानि 9,097.54 रुपये के करीब पर पहुंच गई है। ऐसे हालात में भारत के लिए मुश्किल हो सकती है। भारत को तेल के लिए अतिरिक्त व अधिक इंतजाम करना होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरानी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए लिखा कि ईरान ने समझौता करने में बहुत ज्यादा वक्त लगा दिया। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, "हमने कल भी उन्हें करारा जवाब दिया था और आज भी बहुत जबरदस्त हमला करने जा रहे हैं।" इसके फौरन बाद, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने घोषणा की कि बातचीत का समय खत्म हो चुका है और अब ईरान के मुख्य ठिकानों पर बमबारी की जाएगी। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने टॉमहॉक मिसाइलों से दक्षिणी ईरान में स्थित रडार, सर्विलांस साइटों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने के जवाब में की गई है।
अमेरिकी हमले से भड़के ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि वाशिंगटन के इस कदम ने अप्रेल के संघर्षविराम को "व्यावहारिक रूप से अर्थहीन" बना दिया है। ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स' ने जॉर्डन में अमेरिकी सेना के मुख्य नियंत्रण केंद्र 'मुवफ्फाक साल्टी एयरबेस'पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। ईरान ने कहा कि इस हमले में कई अमेरिकी लड़ाकू विमान नष्ट हो गए। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया है। इसके अलावा बहरीन की राजधानी मनामा और कुवैत में भी ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद एयर रेड सायरन गूंज उठे, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा पहलू लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष है। ईरान लगातार यह मांग कर रहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्थायी शांति समझौते में लेबनान के मोर्चे को भी शामिल किया जाए। दूसरी तरफ, अमेरिका और इजरायल इस मोर्चे को अलग रखना चाहते हैं। यही कूटनीतिक गतिरोध इस समय सीजफायर टूटने और नए सिरे से युद्ध शुरू होने की मुख्य वजह बना हुआ है।