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ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का फंड क्या है, कौन देगा पैसा और क्यों मचा है अमेरिका में बवाल?

अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते में 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड का प्रस्ताव चर्चा में है। जानिए यह पैसा कहां से आएगा, ट्रंप प्रशासन क्या कह रहा है और अमेरिका में इसका विरोध क्यों हो रहा है।

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Jun 23, 2026
Masoud Pezeshkian and Donald Trump
Masoud Pezeshkian and Donald Trump

US Iran Deal: स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत के बाद एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते में परमाणु निरीक्षण, क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में संभावित राहत और आर्थिक सहयोग समेत कई मुद्दों को शामिल किया गया है।

दोनों देशों ने इन विषयों पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत जारी रखने पर भी सहमति जताई है। हालांकि समझौते का एक हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है। यह हिस्सा ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के फंड से जुड़ा है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस योजना में अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा खर्च नहीं होगा। इसके बावजूद वॉशिंगटन में इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ कुछ रिपब्लिकन सांसद भी सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी योजना की जरूरत क्या है और इसका असर क्या होगा। यही वजह है कि यह प्रस्ताव समझौते का सबसे चर्चित और विवादित हिस्सा बन गया है।

क्या है 300 अरब डॉलर का प्रस्ताव?

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच साइन हुए एमओयू में कम से कम 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास योजना तैयार करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य सालों से प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे ईरान में निवेश बढ़ाना और विकास परियोजनाओं को गति देना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते में यह साफ नहीं किया गया है कि इतनी बड़ी राशि कहां से आएगी और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। इसके लिए 60 दिनों की बातचीत अवधि तय की गई है जिसके दौरान फंड के लिए पैसा जुटाने और पूरी योजना को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।

ट्रंप प्रशासन क्या कह रहा है?

समझौते के सामने आने के बाद अमेरिका में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या वॉशिंगटन ईरान को 300 अरब डॉलर देने जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे दावों को खारिज करते हुए उन्हें 'फेक न्यूज' बताया है।

अल जजीरा के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि इस व्यवस्था के तहत अमेरिकी धन का एक भी सेंट ईरान को नहीं जाएगा। उनका कहना है कि यह कोई सरकारी भुगतान नहीं है और इसका मकसद निवेश को बढ़ावा देना है।

वेंस ने कहा कि इस फंड के लिए खाड़ी देशों और दुनिया भर के निजी निवेशकों से पैसा आ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी देश ने खुलकर यह नहीं कहा है कि वह इस योजना के लिए पैसा देगा।

पैसा कहां से आएगा?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड के लिए सरकारी मदद की बजाय निजी निवेशकों से पैसा जुटाने की प्लानिंग है। यानी इसे किसी आर्थिक सहायता पैकेज या मुआवजे की तरह नहीं देखा जा रहा है।

रिपोर्ट में बातचीत से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्रस्तावित राशि के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए निजी निवेशकों की शुरुआती सहमति मिल चुकी है। साथ ही फंड में किसी सरकार का पैसा शामिल नहीं होगा। इसे ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत या विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों से भी अलग रखा जाएगा।

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