
US Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग को रोकने के लिए पिछले हफ्ते हुए समझौते पर कूटनीतिक घमासान तेज हो गया है। ईरान ने इस शांति समझौते को अपनी बड़ी जीत बताते हुए इसे सीधे तौर पर अमेरिका की 'हार का ऐलान' करार दिया है। दूसरी तरफ, इस डील से असहज और डरे हुए अपने खाड़ी सहयोगी देशों को भरोसा देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खाड़ी क्षेत्र का एक बेहद अहम दौरा शुरू कर दिया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के बाद भी दोनों महाशक्तियों के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर तनातनी बरकरार है।
ईरान की बातचीत टीम के प्रमुख और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने साफ किया है कि दोनों देशों के बीच हुआ यह समझौता किसी दबाव या मजबूरी का नतीजा नहीं है। गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि 'इस्लामाबाद सहमति पत्र' (MoU) असल में बहादुर ईरानी राष्ट्र के कड़े प्रतिरोध और उसकी ताकत का परिणाम है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यही वजह है कि यह समझौता अमेरिका की शिकस्त का दस्तावेज बन चुका है। ईरान ने इस बात पर भी जोर दिया कि मिडिल ईस्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ इसी क्षेत्र के देशों की होनी चाहिए और इसमें किसी भी बाहरी ताकत का दखल मंजूर नहीं किया जाएगा।
इस शांति समझौते से खाड़ी देश और इजराइल काफी हैरान और परेशान हैं। दरअसल, पिछले हफ्ते वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए इस समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके समर्थक लड़ाके गुटों (प्रॉक्सी) पर कोई लगाम नहीं लगाई गई है जो इन देशों के लिए हमेशा से बड़ा खतरा रहे हैं। इसी सुरक्षा चिंता को दूर करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंच चुके हैं। वे यूएई के शीर्ष नेता शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ बंद कमरे में अहम बैठक करेंगे। इसके बाद वे कुवैत और बहरीन का दौरा करके खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की बैठक में भी शामिल होंगे।
इस कूटनीतिक खींचतान के बीच समुद्री व्यापार के सबसे संवेदनशील रास्ते पर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। ओमान और ईरान इस बात पर विचार कर रहे हैं कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस सप्लाई वाले रास्ते हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से नेविगेशन फीस या टैक्स वसूला जाए। अबू धाबी पहुंचते ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि हॉर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश को इस समुद्री रास्ते पर टैक्स वसूलने का कोई अधिकार नहीं है।
ईरान के मुख्य वार्ताकार गालिबाफ ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के लिए लेबनान में युद्धविराम होना उतना ही जरूरी था जितना खुद ईरान में शांति स्थापित करना। इस साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के बड़े हवाई हमलों के बाद इस युद्ध की शुरुआत हुई थी, जिसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों पर हजारों ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं। इस भीषण जंग के बाद अब लेबनान के प्रभावित इलाकों के लोग मलबे से अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। लेबनान के टायर शहर में अपनी दुकान दोबारा खोलने वाले हुसैन हसन कहते हैं कि चाहे कितने भी युद्ध हो जाएं, हम फिनिक्स पक्षी की तरह मलबे से दोबारा उठ खड़े होंगे और काम पर लौटेंगे।
इस समझौते के बाद भी परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के दावों में बड़ा विरोधाभास दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान संयुक्त राष्ट्र (UN) के परमाणु निरीक्षकों को वापस देश में आने देने के लिए पूरी तरह सहमत हो गया है लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने भरोसा जताया है कि ईरान के परमाणु केंद्रों की जांच जल्द ही शुरू होगी चाहे इसमें एक हफ्ता लगे या दस दिन। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी के अनुसार, समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अगले हफ्ते मंगलवार से इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत का अगला दौर शुरू हो सकता है।