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US Iran Peace Talks: या तो डील होगी या फिर जंग, ईरान के साथ शांति वार्ता के बीच डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी शर्त

US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि या तो दोनों देशों के बीच कड़ी शर्तों वाली डील होगी या हालात जंग तक पहुंच सकते हैं।

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May 25, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- AI)

US Iran Peace Talks:अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नई और सख्त शर्त जोड़ दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के साथ समझौता होता है तो मध्य-पूर्व के कई देशों को ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ का हिस्सा बनना होगा। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि या तो सभी पक्षों के लिए बड़ी डील होगी, नहीं तो हालात फिर युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

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ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लंबी पोस्ट लिखते हुए कहा कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए काफी प्रयास किए हैं। ऐसे में सऊदी अरब, कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, बहरीन और दूसरे देशों को अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौते पर पहुंचता है तो उसे भी इस गठबंधन में शामिल किया जा सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो क्षेत्र में संघर्ष और बड़ा हो सकता है।

क्या हैं अब्राहम अकॉर्ड्स?

अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत साल 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान हुई थी। यह अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ ऐसा समझौता है, जिसके तहत कई मुस्लिम देशों ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध सामान्य किए थे।

संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन सबसे पहले इस समझौते में शामिल हुए थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इससे जुड़े। अमेरिका इसे मध्य-पूर्व में स्थिरता और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ी पहल मानता है।

पहले से ही कई शर्तों पर अटकी है वार्ता

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पहले से ही कई जटिल मुद्दों पर अटकी हुई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खुला रखे और यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे।

इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी और क्षेत्रीय तनाव कम करने जैसी मांगें भी अमेरिका की ओर से रखी गई हैं। अब ट्रंप की नई शर्त ने वार्ता को और कठिन बना दिया है।

मार्को रुबियो ने जताई थी उम्मीद

कुछ दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने संकेत दिए थे कि समझौते को लेकर जल्द अच्छी खबर आ सकती है।

रुबियो ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत में प्रगति हुई है और दोनों पक्ष कई मुद्दों पर करीब पहुंचे हैं। हालांकि ट्रंप के नए बयान के बाद स्थिति फिर जटिल दिखाई देने लगी है।

ईरान ने क्या कहा?

ईरान ने भी माना है कि बातचीत में कुछ मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौता अभी दूर है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि कई विषयों पर सहमति बनी है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि समझौता होने वाला है।

ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा।

मध्य-पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप मध्य-पूर्व में नया रणनीतिक गठबंधन तैयार करना चाहते हैं, जिसमें इजरायल और कई अरब देशों को एक मंच पर लाया जाए।

हालांकि सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले भी साफ किया है कि फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के बिना इजरायल के साथ संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाना आसान नहीं होगा। ऐसे में ट्रंप की नई शर्त शांति वार्ता को और लंबा खींच सकती है।

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