
US Iran Talks: अमेरिका, ईरान और कतर के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अहम बातचीत शुरू हो गई है। इस बैठक में लेबनान में पूरी तरह से सीजफायर, विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। कतर और पाकिस्तान इस बातचीत में मीडिएटर की भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने रविवार को बताया कि तीनों देशों के प्रतिनिधि बातचीत के लिए एक साथ बैठे हैं। वहीं कतर के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच आधिकारिक बातचीत शुरू हो चुकी है।
कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत का उद्देश्य ऐसे व्यापक और स्थायी समझौते तक पहुंचना है जिसमें समझौता ज्ञापन (MoU) में शामिल सभी मुद्दों का समाधान हो सके। बातचीत में लेबनान में स्थायी युद्धविराम और विदेशों में जमी ईरानी संपत्तियों की रिहाई प्रमुख एजेंडा हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि चारों प्रतिनिधिमंडल मीडिएटर के साथ शुरुआती बैठकों के बाद सीधे बातचीत सत्र में हिस्सा लेंगे।
यह बातचीत जून में हुए उस समझौता ज्ञापन के बाद हो रही है जिसने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता खोला था। इसी समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला गया और लेबनान में इजरायल तथा हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई रोकने की बात कही गई थी।
हालांकि लेबनान में जारी झड़पों ने इस कूटनीतिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक लेबनान में संघर्ष पूरी तरह नहीं रुकता तब तक अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल होगा।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत का मुख्य फोकस ईरान का परमाणु कार्यक्रम और लेबनान की स्थिति होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों मुद्दों पर प्रगति हो सकती है।
वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दोहराया है कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने का इरादा नहीं रखता। उन्होंने कहा कि ईरान इस बात का लिखित आश्वासन देने को भी तैयार है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों की रिहाई और ईरानी तेल निर्यात के लिए लाइसेंस जारी करने का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा है।
हालांकि दोनों पक्षों ने वार्ता को लेकर उम्मीद जताई है, लेकिन लेबनान में जारी हिंसा अभी भी इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।