US Military: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अगर ईरान नहीं झुका, तो अमेरिका अपनी खौफनाक सैन्य ताकत से उसके ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है।
Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बहुत सख्त चेतावनी जारी की है, जिससे पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। ट्रंप ने खुले तौर पर ऐलान किया कि यदि ईरान ने 48 घंटों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं किया और नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे नेस्तनाबूद कर देगा। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि या तो वे अमेरिका के साथ समझौता करें या फिर "जहन्नुम" का सामना करने के लिए तैयार रहें।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही मौजूदा जंग ने पश्चिमी एशिया को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है। दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है। ईरान की ओर से इसे बाधित किए जाने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और पेट्रोल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।
हालाँकि, ट्रंप का यह अल्टीमेटम ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह रही कि 48 घंटे पूरे होने से पहले ही ट्रंप ने अपने रुख में बदलाव किया और अगले 5 दिनों तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला न करने की घोषणा कर दी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। इसी बीच, दक्षिणी ईरान के ऊपर एक अमेरिकी 'F-15E स्ट्राइक ईगल' फाइटर जेट के मार गिराए जाने की घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
जब अमेरिका ईरान पर कहर बरपाने की बात करता है, तो उसके पीछे दुनिया की सबसे उन्नत और शक्तिशाली सेना का बल होता है। अमेरिका के पास अजेय वायुसेना और स्टील्थ तकनीक है। उसके पास B-2 स्पिरिट और B-21 रेडर जैसे स्टील्थ बॉम्बर हैं, जो रडार की पकड़ में आए बिना दुनिया के किसी भी कोने में घुस कर सटीक हमला कर सकते हैं। F-35 और F-22 रैप्टर जैसे 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान अमेरिकी वायुसेना को हवा में अद्वितीय श्रेष्ठता प्रदान करते हैं।
अमेरिकी नौसेना के पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाले 11 विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। फारस की खाड़ी और भूमध्य सागर के आसपास तैनात अमेरिकी युद्धपोत और पनडुब्बियां टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से ईरान के किसी भी सैन्य या ऊर्जा ठिकाने को सटीकता से तबाह कर सकती हैं।
अमेरिका के पास 'बंकर-बस्टर बम' (Bunker Buster Bombs) का जखीरा है, जो जमीन के बहुत नीचे बने ईरान के भूमिगत परमाणु और सैन्य बंकरों को भेदने में सक्षम हैं। इसके साथ ही, MQ-9 Reaper जैसे उन्नत ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर चौबीसों घंटे खुफिया निगरानी और लक्षित हमले करने की अचूक क्षमता रखते हैं।
अमेरिका की इस भारी-भरकम सैन्य ताकत और अल्टीमेटम के बावजूद ईरान ने झुकने से इनकार कर दिया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका उनके ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करता है, तो वे भी अमेरिका और उसके सहयोगियों के ऊर्जा संयंत्रों और सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाएंगे।
डोनाल्ड ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम और उसके तुरंत बाद लिया गया 'यू-टर्न' यह दर्शाता है कि यह भू-राजनीतिक संकट बेहद जटिल है। अमेरिका की सैन्य ताकत बेजोड़ है, लेकिन ईरान के साथ एक खुला युद्ध पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव युद्ध का विकराल रूप लेता है या फिर कूटनीति के जरिये शांति का कोई मार्ग प्रशस्त होता है।