US-Iran-War: इजराइल ने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता और ईरान वार्ता में उसकी भूमिका को महत्व नहीं देता। वहीं भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बताया गया है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई देश ईरान से जुड़े इस अंतरराष्ट्रीय विवाद को कम करने के लिए बातचीत और मध्यस्थता के प्रयास कर रहे हैं। इसी बीच इजराइल ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। इजराइली राजदूत ने कहा है कि जिन देशों के साथ उनके औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इजरायल का यह बयान सामने आने के बाद से क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
इजराइल के भारत स्थित राजदूत रूवेन अजार ने साफ कहा कि उनका देश उन देशों पर भरोसा नहीं करता जिनके साथ उसके औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब खबरें सामने आई थीं कि पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच संभावित वार्ता में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने हाल ही में एक पोस्ट शेयर कर कहा था कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच अर्थपूर्ण और निर्णायक वार्ता कराने के लिए तैयार है और ऐसा करने पर वह सम्मानित महसूस करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी शरीफ के इस पोस्ट को रिशेयर किया था जिसके बाद पाकिस्तान के बीच वार्ता कराने की अटकलें और तेज हो गई थी।
लेकिन इसी बीच इजरायली राजदूत रूवेन अजार का इस मामले में बयान सामने आने से फिर से चर्चाएं तेज हो गई है। अजार ने यह भी स्पष्ट किया कि इजराइल अपनी विदेश नीति अपने आकलन और अपने प्रमुख सहयोगियों के दृष्टिकोण के आधार पर तय करता है। इससे यह संकेत मिलता है कि इजराइल फिलहाल पाकिस्तान की किसी भी पहल को गंभीरता से नहीं ले रहा है। पाकिस्तान के अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की पेशकश को इजराइल ने महत्व नहीं दिया है। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय कूटनीति में भरोसे का संकट गहराता जा रहा है।
इजराइल ने इस दौरान भारत के साथ अपने मजबूत संबंधों को भी दोहराया। राजदूत अजार ने कहा कि भारत और इजराइल के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में गहरा सहयोग है। दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और कृषि जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं और भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होगी। इससे साफ है कि जहां पाकिस्तान को लेकर संदेह बना हुआ है, वहीं भारत के साथ संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।