
डोनाल्ड ट्रंप और शहबाज शरीफ (फोटो- एएनआई)
US-Iran-War: मध्य पूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहरे प्रभाव में ला दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने ऊर्जा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तक कई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) के पोस्ट को शेयर करने से नई कूटनीतिक अटकलें शुरू हो गई हैं। इस पोस्ट में शरीफ ने ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता कराने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इस पोस्ट को रिशेयर किया है जो शरीफ की बात पर उनकी सहमती को दर्शाता है।
शहबाज शरीफ ने अपने पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान ने मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध को खत्म करने और शांति स्थापित करने के लिए हो रही बातचीत का पूरा समर्थन किया है। पाकिस्तान इस क्षेत्र में स्थिरता देखना चाहता है। शरीफ ने आगे लिखा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच अर्थपूर्ण और निर्णायक वार्ता कराने के लिए तैयार है और ऐसा करने पर वह सम्मानित महसूस करेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत ठप पड़ी हुई है। पाकिस्तान का यह कदम खुद को एक न्यूट्रल प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसके संबंध वाशिंगटन और तेहरान दोनों से हैं।
शरीफ के इस पोस्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से रिशेयर किया है। यह इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका इस विकल्प पर विचार कर सकता है, भले ही आधिकारिक पुष्टि न हुई हो। इसी बीच ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि ईरान ने उसकी मांगों को स्वीकार कर लिया है और दोनों देशों के बीच युद्ध जल्द ही रुक जाएगा। हालांकि ईरान ने ट्रंप के वार्ता दावों को खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि फिलहाल कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है।
वहीं पाकिस्तान के दावों की बात की जाए तो ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने स्वीकार किया है कि दोस्त देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है, लेकिन निर्णय उनके सिद्धांतों पर आधारित होंगे। वहीं वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रेज़ाई (Mohsen Rezaei) ने साफ किया कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक प्रतिबंधों में राहत, मुआवजा और भविष्य की सुरक्षा गारंटी नहीं मिलती। यह रुख दिखाता है कि ईरान किसी भी समझौते से पहले ठोस शर्तें चाहता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश बैकचैनल मध्यस्थ के रूप में सक्रिय हैं। संभावित वार्ता प्रारूपों में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। एक अन्य विकल्प में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबाफ की मुलाकात की चर्चा है। गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए अमेरिका पर संकट से बचने की कोशिश का आरोप लगाया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे आर्थिक संकट की आशंका बढ़ गई है। हालांकि पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान के साथ तनाव में उलझा हुआ है, फिर भी उसकी यह कूटनीतिक पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Updated on:
25 Mar 2026 09:11 am
Published on:
25 Mar 2026 09:11 am
