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ट्रंप के एक्शन से भड़का तेहरान: ओमान की खाड़ी में दागे ड्रोन, कच्चे तेल के दाम में लगी जबरदस्त आग

Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में भारी सैन्य तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी जहाज जब्त करने के बाद कच्चे तेल के दामों में 5% से ज्यादा का उछाल आया है।

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Apr 20, 2026
अमेरिका ने ने ओमान की खाड़ी में ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' पर हमला किया । (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

Escalation : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उनके बलों ने एक ईरानी जहाज को जब्त कर लिया है। यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस बड़ी सैन्य घटना के बाद मध्य पूर्व क्षेत्र में अचानक युद्ध की आशंकाएं बहुत गहरा गई हैं ।दोनों देशों के बीच यह टकराव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं।

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जानिए कैसे हुआ समंदर में हमला

अमेरिका के मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत यूएसएस स्प्रूअंस ने ओमान की खाड़ी में ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को आगे बढ़ने से रोका। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, जहाज को रुकने की उचित चेतावनी दी गई थी। जब ईरानी क्रू ने चेतावनी नहीं मानी, तो अमेरिकी नौसेना ने जहाज के इंजन रूम में छेद कर दिया और उसे अपने पूर्ण कब्जे में ले लिया। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज नाकाबंदी तोड़ रहा था।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और चेतावनी

इस घटना से ईरान बुरी तरह भड़क गया है और उसने इसे आक्रामकता बताया है। ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने इसे अमेरिका की "खुली आक्रामकता" और "समुद्री डकैती" करार दिया है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि वह इस हमले का कड़ा और मुंहतोड़ जवाब देगा। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी युद्धपोतों की तरफ ड्रोन हमले भी किए हैं जिससे स्थिति और नाजुक हो गई है।

पाकिस्तान में शांति वार्ता पर सस्पेंस

इस भारी तनाव के बीच अमेरिका ने कहा है कि उसकी एक विशेष टीम शांति वार्ता के लिए सोमवार को पाकिस्तान जा रही है ताकि सीजफायर को बढ़ाया जा सके। लेकिन ईरान ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत का हिस्सा नहीं बनेगा। ईरान का कहना है कि अमेरिका की लगातार नाकाबंदी और बेतुकी शर्तें युद्धविराम का सीधा उल्लंघन हैं, इसलिए वार्ता का कोई औचित्य नहीं है।

तेल की कीमतों में भारी उछाल

अमेरिका और ईरान के इस सीधे सैन्य टकराव का असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ा है। दोनों देशों के बीच महायुद्ध की आशंका से ब्रेंट क्रूड ऑयल और अन्य कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की भयंकर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसके तेल निर्यात पर रोक जारी रहेगी, दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

जब तक सैन्य दबाव नहीं हटेगा, तब तक तेल बाजार में स्थिरता नहीं आएगी

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक ईरान के तेल निर्यात पर लगी रोक और सैन्य दबाव नहीं हटाया जाएगा, तब तक वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता नहीं आ सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी दूसरों को रोककर अपनी सुरक्षा मुफ्त में नहीं पा सकता। अमेरिका का एक कूटनीतिक दल जल्द ही पाकिस्तान में शांति वार्ता की कोशिश करेगा। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस वार्ता से कोई समाधान निकलेगा।

तेल के दाम बढ़ने से महंगाई का खतरा बढ़ेगा

ईरान के संभावित पलटवार और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय अलर्ट पर है। इस विवाद का असर वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा पड़ रहा है। कई देशों के तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में कतरा रहे हैं। चीन और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इस तनाव का सीधा आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। क्योंकि तेल के दाम बढ़ने से महंगाई का खतरा बढ़ेगा।

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