Kharg Island Attack: वीडियो में दिखाई गई तस्वीरें और फुटेज अमेरिकी सैन्य स्रोतों से हैं, जहां मिसाइलें लक्ष्यों पर गिरती दिख रही हैं, बड़े-बड़े विस्फोट हो रहे हैं और धुआं फैल रहा है।
US-Israel-Iran War: ईरान के खार्ग आइलैंड पर अमेरिका का भीषण प्रहार हुआ है, जहां अमेरिकी सेना ने सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सटीक हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले का वीडियो जारी किया है, जिसमें आसमान से मिसाइलें बरसती दिख रही हैं और धुएं के बादल उठते नजर आ रहे हैं। यह घटना 13-14 मार्च 2026 की रात को हुई, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मध्य पूर्व के इतिहास का सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियान बताया।
खार्ग आइलैंड ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का दिल माना जाता है। यह फारस की खाड़ी में स्थित छोटा-सा द्वीप है, जहां से ईरान के लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात होता है। यहां विशाल तेल भंडारण सुविधाएं, लोडिंग जेटी और सुपरटैंकरों को हैंडल करने की क्षमता है। ईरान-इराक युद्ध (1980-88) में भी इराक ने इसे बार-बार निशाना बनाया था, लेकिन ईरान ने इसे आंशिक रूप से चालू रखा। वर्तमान अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ अभियान में खार्ग आइलैंड रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से तेल निर्यात रुकने पर ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से विश्व का करीब 20% तेल व्यापार गुजरता है, जिसे ईरान प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी सेना ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में खार्ग द्वीप पर 90 से अधिक ईरानी सैन्य लक्ष्यों को नष्ट किया गया। इनमें नौसैनिक माइन स्टोरेज साइट्स, मिसाइल भंडारण बंकर और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि तेल से जुड़ी कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर नहीं निशाना बनाया गया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, 'मैंने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह नहीं किया, लेकिन अगर ईरान या कोई अन्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालेगा, तो मैं तुरंत फैसला बदल दूंगा।'
वीडियो में दिखाई गई तस्वीरें और फुटेज अमेरिकी सैन्य स्रोतों से हैं, जहां मिसाइलें लक्ष्यों पर गिरती दिख रही हैं, बड़े-बड़े विस्फोट हो रहे हैं और धुआं फैल रहा है। यह फुटेज रूह कंपा देने वाला है, क्योंकि यह युद्ध की तीव्रता को दर्शाता है। इजरायल ने भी इसी दौरान तेहरान में ईरान के मुख्य स्पेस रिसर्च सेंटर और एयर डिफेंस सिस्टम फैक्ट्री पर हमले किए, जिसे वे ईरान की सैन्य क्षमता को गहरा नुकसान पहुंचाने का हिस्सा बता रहे हैं।