
US Missile Stockpile: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले पांच महीनों से चल रहे युद्ध के कारण अमेरिकी गोला-बारूद के घटते भंडार ने देश की सैन्य तैयारियों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी सबसे घातक और अत्यधिक सटीक लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है, जिससे इनके स्टॉक पर दबाव बढ़ गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करते समय इसे एक सीमित और अल्पकालिक संघर्ष बताया था। हालांकि, अनुमान के विपरीत युद्ध लंबा खिंचने पर अमेरिका को लंबी दूरी की सटीक मिसाइलों का व्यापक इस्तेमाल करना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, इस रणनीति का उद्देश्य लड़ाकू विमानों का सीमित उपयोग करना और अमेरिकी सैनिकों के संभावित नुकसान को कम रखना था।
अमेरिकी सेना के पास घातक मिसाइलों के घटते भंडार को लेकर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या ईरान पर बड़े सैन्य हमलों में कमी का एक कारण यही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सैन्य सलाहकारों ने लंबी दूरी की मिसाइलों की कमी को लेकर प्रशासन को चेतावनी दी थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर हमले टालने का फैसला लिया गया। ATACMS और PrSM जमीन से जमीन पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें हैं, जबकि टॉमहॉक (Tomahawk) मिसाइलें युद्धपोतों, क्रूजरों और पनडुब्बियों से दागी जाती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन मिसाइलों का मौजूदा भंडार पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
अमेरिकी सेना के सामने केवल आक्रामक हथियारों की ही नहीं, बल्कि रक्षात्मक हथियारों की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इन हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों, रणनीतिक परिसंपत्तियों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
सैन्य अधिकारियों ने पिछले कई सप्ताह से पैट्रियट (Patriot) जैसी एयर डिफेंस मिसाइलों के घटते भंडार को लेकर चिंता जताई है।
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि कुछ गोला-बारूद और मिसाइलों का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की जरूरतों को देखते हुए मौजूदा उत्पादन पर्याप्त नहीं है। ऐसे में तय समय के भीतर अमेरिकी सेना को आवश्यक संख्या में मिसाइलें उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।