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भारत को लेकर अमेरिका का दावा, चीन को ट्रंप के टैरिफ से बचाने वाले ‘शैडो नेटवर्क’ का बताया हिस्सा

US Tariff: अमेरिका की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन ट्रंप के भारी-भरकम टैरिफ से बचने के लिए भारत समेत 40 देशों के रास्तों का इस्तेमाल कर अमेरिकी बाजार में सामान भेज रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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Aug 14, 2026
White House Report, Shadow Transshipment Scam
चीन के सामानों की ट्रांसशिपमेंट को लेकर भारत पर अमेरिका का आरोप (फोटो सोर्स-IANS)

Trump Tariff:अमेरिका ने भारत को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय 'शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क' का हिस्सा बताया है, जिसका इस्तेमाल चीन अमेरिकी सीमा शुल्क यानी टैरिफ से बचने के लिए कर रहा है। व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' में दावा किया गया है कि चीन अपने सामान पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स से बचने के लिए भारत, मेक्सिको और वियतनाम जैसे 40 देशों के रास्ते अमेरिकी बाजारों तक अपना माल पहुंचा रहा है।

तीसरे देशों के रास्ते अमेरिका पहुंचा चीनी माल

रिपोर्ट के अनुसार इस टैक्स चोरी की शुरुआत साल 2018 में हुई थी, जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने चीन से आने वाले सामानों पर 'सेक्शन 301' के तहत भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिया था। इन टैक्स दरों से बचने के लिए चीनी निर्यातक सीधे अमेरिका माल भेजने के बजाय तीसरे देशों के रास्तों का इस्तेमाल करने लगे। उन देशों में मामूली बदलाव, असेंबली, नई पैकिंग या फर्जी कागजात तैयार करके सामान का ओरिजिन (मूल देश) बदल दिया जाता था, जिससे कागजों पर यह साबित किया जा सके कि माल चीन का नहीं बल्कि किसी अन्य और देश का है।

भारत 'टियर-1' देशों की सूची में शामिल

व्हाइट हाउस की इस रिपोर्ट में दुनिया भर के ऐसे करीब 40 देशों की पहचान की गई है, जिनके व्यापारिक मार्गों का इस्तेमाल चीन अपने सामान के लिए कर रहा है। इसमें भारत को कनाडा, जापान, इजरायल और यूरोपीय संघ जैसे अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ 'टियर-1' की श्रेणी में रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक अकेले 2025 में ही मेक्सिको, भारत और वियतनाम के जरिए लगभग 67 अरब डॉलर मूल्य का चीनी सामान अमेरिका पहुंचाया गया, जिससे अमेरिकी सरकार को करीब 28 अरब डॉलर के टैक्स का भारी नुकसान हुआ है।

भारत का पुणे-गुजरात-चेन्नई कॉरिडोर और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई कॉरिडोर को चीनी इलेक्ट्रिक पंपों और कंप्रेसरों के ट्रांसशिपमेंट से खासा आर्थिक फायदा पहुंचा है। हालांकि इसकी भारी कीमत अमेरिकी कंपनियों और वहां के स्थानीय निर्माताओं को चुकानी पड़ी है।
इस अवैध व्यापार के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। अनुमान है कि इस ट्रांसशिपमेंट के चलते अमेरिका में लगभग 4,50,000 नौकरियों का नुकसान हुआ है और उसकी सालाना GDP में 113 से 150 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही अमेरिकी सरकार को 19 से 26 अरब डॉलर के संघीय राजस्व का घाटा सहना पड़ा है। स्थिति को देखते हुए व्हाइट हाउस ने अब चेतावनी दी है कि जो भी देश इस तरह से चीन की मदद कर रहे हैं, उन पर तुरंत रोक लगाई जाएगी, जुर्माना लगाया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Updated on:
14 Aug 2026 10:32 am
Published on:
14 Aug 2026 09:07 am