
Donald Trump: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक और बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक समुद्री जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों का जवाब देते हुए अमेरिका ने ईरान के अवैध 'डिजिटल एसेट नेटवर्क' पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कारवाई के तहत ईरान की 6 कंपनियों और 1 मुख्य व्यक्ति को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इन प्रतिबंधों में ईरान के दो बड़े डिजिटल एसेट एक्सचेंज और इस पूरे नेटवर्क को चलाने वाला सरगना शामिल है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके अरबों डॉलर का काला धन (मनी लॉन्ड्रिंग) इधर-उधर कर रहा था।
विदेश विभाग के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ईरान इन अवैध डिजिटल माध्यमों से फंड जुटाकर अपने सैन्य अभियानों, आतंकवाद और परमाणु कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने वाली सटीक जानकारी देने वाले को 'रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस' कार्यक्रम के तहत 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 125 करोड़ रुपये) का इनाम देने की घोषणा भी की गई है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद जताई है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर बातचीत सही दिशा में चल रही है और यह मामला जल्द खत्म हो सकता है।
हालांकि, ट्रंप ने ये बात भी बोली है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मकसद अपने सहयोगियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना है।
तेहरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई और बयानों को खारिज कर दिया है। ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल सैयद मजीद इब्न रजा ने कहा कि उनकी सेना अमेरिका या इज़राइल के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वहीं, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने अमेरिका पर दिखावटी कूटनीति करने का आरोप लगाया है। जून में हुआ 14-सूत्रीय शांति समझौता ध्वस्त होने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते और मुश्किल हो गए हैं।