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भारत पर 100% टैरिफ का विरोध, आखिर अमेरिकी सीनेटर रैंड पॉल और रॉन वायडेन ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को क्यों घेरा?

US Senate Tariff Bill on India: रूस से तेल खरीदने पर भारत और चीन समेत पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले बिल को अमेरिकी सीनेट ने मंजूरी दी। अब बिल प्रतिनिधि सभा में जाएगा। जानें रैंड पॉल और रॉन वायडेन ने इस फैसले पर क्या कहा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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Aug 08, 2026
India Russia Oil Tariff Bill in US Senate
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- ANI)

100% Tariff on India: अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को एक ऐसे विधेयक को पारित कर दिया, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने के मामले में भारत, चीन और तीन अन्य देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अब यह विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा। प्रतिनिधि सभा की बैठक 31 अगस्त को दोबारा शुरू होने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। कानून बनने के लिए इस बिल को प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलना जरूरी है। इसके बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी पर यह कानून बन जाएगा। बिल राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इस बिल को लेकर अब अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

क्या बोले सीनेटर रैंड पॉल और रॉन वायडेन?

सीनेटर रैंड पॉल ने प्रस्तावित टैरिफ की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका के लिए अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। उन्होंने भारत पर इस तरह का अतिरिक्त टैक्स लगाने के संभावित असर पर भी चिंता जताई। रैंड पॉल के मुताबिक, भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने से भारत-अमेरिका संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी भी प्रभावित हो सकती है। वहीं, सीनेटर रॉन वायडेन ने भी टैरिफ संबंधी प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम अमेरिका के आर्थिक और कूटनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे महत्वपूर्ण सहयोगी देशों के साथ संबंधों में अनावश्यक तनाव भी बढ़ सकता है।

बिल में क्या है?

‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ बिल राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इन देशों में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं। यह राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का विवेकाधीन अधिकार देता है।

रूस से सस्ता तेल खरीद रहा भारत

रूस-यूक्रेन युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। युद्ध के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू किया। रूस से मिलने वाला तेल कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध रहा है। इससे भारत को घरेलू स्तर पर महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिली। भारत ने रूस से खरीदे गए कच्चे तेल को रिफाइन कर दूसरे देशों को भी निर्यात किया। इससे भारतीय रिफाइनरियों को आर्थिक लाभ भी मिला।

Updated on:
08 Aug 2026 02:32 pm
Published on:
08 Aug 2026 02:32 pm