
US Supreme Court Transgender Sports Ban: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर (Transgender) खिलाड़ियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इडाहो (Idaho) और वेस्ट वर्जीनिया के उन कानूनों को सही ठहराया है, जिनके तहत ट्रांसजेंडर लड़कियों और महिलाओं को महिला खेल टीमों में हिस्सा लेने से रोका जा सकता है। इस फैसले का असर सिर्फ दो राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका के 25 अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा जहां इसी तरह के नियम लागू हैं।
यह मामला इडाहो की कॉलेज छात्रा लिंडसे हेकॉक्स और वेस्ट वर्जीनिया की 15 साल छात्रा बेकी पेपर-जैक्सन से जुड़ा था। दोनों छात्रों ने अपने-अपने राज्यों के कानूनों को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि इन नियमों के कारण उनके साथ भेदभाव हो रहा है और यह अमेरिकी संविधान के समान अधिकारों के नियमों के खिलाफ है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के उन फैसलों को पलट दिया, जिनमें दोनों छात्रों के पक्ष में फैसला आया था।
इडाहो और वेस्ट वर्जीनिया का कहना था कि महिला खेलों में निष्पक्ष मुकाबला बनाए रखने के लिए ऐसे नियम जरूरी हैं। समर्थकों का तर्क है कि जन्म के समय तय जैविक अंतर खेलों में प्रतिस्पर्धात्मक फायदा दे सकते हैं। वहीं, विरोधियों का कहना है कि ये कानून ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों को सीमित करते हैं। जनवरी में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कुछ रूढ़िवादी जजों ने भी महिला खेलों में निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई थी।
यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के पक्ष में भी माना जा रहा है। ट्रंप लंबे समय से महिला खेलों में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी का विरोध करते रहे हैं। ट्रंप ने इस मुद्दे को साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में भी उठाया था और डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा था। उनके प्रशासन ने ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े कई मामलों में सख्त कदम उठाए हैं। इनमें जेंडर पहचान से जुड़े नियमों में बदलाव और कुछ मेडिकल सुविधाओं पर रोक लगाने जैसी नीतियां शामिल हैं।
लिंडसे हेकॉक्स ने इडाहो के साल 2020 के कानून को चुनौती दी थी। यह अमेरिका का पहला ऐसा कानून था, जिसमें ट्रांसजेंडर महिलाओं और लड़कियों को महिला खेल टीमों से रोकने का प्रावधान था। बाद में हेकॉक्स ने मामला खत्म करने की कोशिश की थी क्योंकि उन्होंने खेलों में हिस्सा लेना छोड़ दिया था और उन्हें उत्पीड़न का डर था। लेकिन कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखी।
वहीं, बेकी पेपर-जैक्सन ने वेस्ट वर्जीनिया के कानून को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उन्होंने कम उम्र में जेंडर से जुड़ा इलाज कराया था और उन्हें पुरुष यौवन का अनुभव नहीं हुआ, इसलिए उन्हें कोई अतिरिक्त खेल लाभ नहीं मिला।