Immigration: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही आव्रजन (Trump Immigration Policy 2026) नियमों में बड़े बदलाव करने का सिलसिला शुरू हो गया है। ताजा अपडेट के अनुसार, अमेरिका ने भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल और भूटान (Bangladesh Nepal Bhutan Visa)सहित 38 देशों के यात्रियों के लिए 15,000 डॉलर […]
Immigration: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही आव्रजन (Trump Immigration Policy 2026) नियमों में बड़े बदलाव करने का सिलसिला शुरू हो गया है। ताजा अपडेट के अनुसार, अमेरिका ने भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल और भूटान (Bangladesh Nepal Bhutan Visa)सहित 38 देशों के यात्रियों के लिए 15,000 डॉलर (करीब 12.5 लाख रुपये) तक का 'वीजा बॉन्ड' (US Visa Bond Proposal) अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए है, जो वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में अवैध रूप से रुक जाते हैं (US Border Security)।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि कई देशों के नागरिक पर्यटक या बिजनेस वीजा पर अमेरिका आते हैं, लेकिन वापस नहीं लौटते। नए नियमों के तहत, इन देशों के यात्रियों को अमेरिका में प्रवेश से पहले एक बड़ी राशि 'बॉन्ड' के रूप में जमा करवानी होगी। अगर यात्री समय सीमा के अंदर अपने देश लौट जाते हैं, तो यह राशि उन्हें वापस कर दी जाएगी, अन्यथा इसे जब्त कर लिया जाएगा। हालांकि भारत इस सूची में फिलहाल शामिल नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके दूरगामी भारतीय आव्रजन नीति पर भी असर हो सकते हैं।
विदेश नीति विशेषज्ञ: "पड़ोसी देशों पर वीजा बॉन्ड का असर भारत पर भी पड़ेगा, क्योंकि इससे क्षेत्रीय आवाजाही और आर्थिक संबंधों में जटिलता आएगी। भारत को अमेरिका के साथ 'वीजा वेवर' या रियायतों के लिए ठोस बातचीत करनी होगी।"
अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि यह नियम अभी 'प्रस्ताव' के चरण में है और विभिन्न देशों से फीडबैक लिया जा रहा है। वहीं, असम में अगले 24 घंटों तक सुरक्षा अलर्ट जारी रहेगा और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
वीजा बॉन्ड की यह नीति केवल सुरक्षा से जुड़ी हुई नहीं है, बल्कि यह ट्रंप की 'प्रोटेक्शनिस्ट' (संरक्षणवादी) नीति का हिस्सा है। इसका असर वैश्विक पर्यटन उद्योग पर पड़ सकता है। यदि अन्य विकसित देश भी इसी तरह के बॉन्ड की मांग करने लगे, तो अंतरराष्ट्रीय यात्रा केवल अमीरों तक सीमित रह जाएगी।