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US-India relations : ‘चीन नहीं, अमेरिका के लिए भारत है बेहतर पार्टनर, ‘ट्रंप की पूर्व सलाहकार विक्टोरिया कोट्स का बड़ा बयान

India-US Strategic Partnership: विक्टोरिया कोट्स ने भारत को अमेरिका का सबसे शानदार संभावित सहयोगी बताया है। उन्होंने कहा कि रूस और चीन के बीच संतुलन बनाने में भारत की भूमिका अहम है।

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Jun 09, 2026
PM Modi and US President Donald Trump
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप। ( फाइल फोटो: ANI)

China-US Tension : भारत,अमेरिका और चीन को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है, जिससे दुनिया की सियासत में हलचल मच सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्टोरिया कोट्स ने वैश्विक भू-राजनीति के बारे में यह बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वाशिंगटन के लिए बीजिंग की तुलना में नई दिल्ली कहीं अधिक भरोसेमंद और बेहतर साझेदार है। कोट्स के अनुसार, भारत में एक वैश्विक महाशक्ति बनने की पूरी क्षमता है और अमेरिका के साथ इसकी साझेदारी भविष्य की दिशा तय करेगी।

युद्ध अभ्यास और आर्थिक मंदी का खतरा

कोट्स ने हाल ही में हुए एआई-आधारित युद्ध अभ्यास 'ऑपरेशन टाइडल वेव' का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि चीन के साथ किसी भी प्रत्यक्ष संघर्ष की स्थिति में वैश्विक जीडीपी में 10% की भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की हालिया चीन यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्थिक मंदी और संघर्षों को टालने के लिए बीच का रास्ता निकालना था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चीन के साथ दोस्ती हो गई है। चीन आज भी अमेरिका के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा और आर्थिक खतरा बना हुआ है।

मोदी-ट्रंप बॉन्डिंग और ऊर्जा समीकरण

विक्टोरिया कोट्स ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के व्यक्तिगत संबंधों को दोनों देशों के लिए एक बड़ी संपत्ति बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह अमेरिका ने भारत की ईरान पर तेल निर्भरता को कम करने में मदद की थी, उसी तरह अब रूस से होने वाले गैस आयात के विकल्प के रूप में अमेरिकी प्राकृतिक गैस एक मजबूत आधार बन सकती है।

अमेरिकी रणनीतिक हलकों में भारत को केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं

कोट्स का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिकी रणनीतिक हलकों में भारत को केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि चीन के काट के रूप में एक अनिवार्य वैश्विक भागीदार माना जा रहा है। इस बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू 'ऊर्जा कूटनीति' है। अमेरिका अब भारत को रूस के प्रभाव से पूरी तरह बाहर निकालने के लिए अपने विशाल प्राकृतिक गैस भंडार को एक हथियार और प्रस्ताव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। (इनपुट: ANI)