
Middle East Tensions: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होता है, तो क्या इजरायल उसे स्वीकार करेगा? क्या वह हमले जारी रखेगा। दुनिया की नजरे इस पर टिकी हैं। लेकिन इस बहस के बीच भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने सबकुछ साफ कर दिया कि इजरायल किसी ऐसी डील का हिस्सा नहीं है, जिसमें उसकी भागीदारी ही न हो। साथ ही उन्होंने दोहराया कि इजरायल अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा।
रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचाया है और अब तेहरान को उसके कदमों के परिणाम भी भुगतने पड़ रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल इजरायल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद करेगा। इसके आलावा उन्होंने आगे ये भी कहा कि हम ईरान को अपनी सुरक्षा तय करने की इजाजत नहीं देंगे।
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में रूवेन अजार ने साफ कहा कि इजरायल पाकिस्तान को भरोसेमंद साझेदार नहीं मानता। पाकिस्तान के नेताओं और अधिकारियों के बयानों ने दोनों देशों के बीच अविश्वास और भी बढ़ा दी है। खास तौर पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उन पुराने बयानों का जिक्र किया, जिनमें इजरायल को लेकर बेहद कड़ी और विवादित टिप्पणियां की गई थीं। इजरायल का मानना है कि ऐसे बयानों के बाद पाकिस्तान को क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया में निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में देखना मुश्किल है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ हुए समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए दावा किया कि इससे पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और समुद्री गतिविधियों को सामान्य करने की बात कही गई है।
हालांकि, इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ कोई भी समझौता इजरायल को बाध्य नहीं करता। उनका कहना था कि इजरायल अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लेगा।