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कोरोना की सूचना बाद लोगों ने छोड़ा गांव की राह, अब नहीं लग रहे चौपाल

पीडि़त व्यक्ति कर रहा गांवों में मजदूरी, परिजनों का भर रहा पेट

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After the information of Corona, people left the way of the village, n

कोरोना की सूचना बाद लोगों ने छोड़ा गांव की राह, अब नहीं लग रहे चौपाल

अनूपपुर। जिला मुख्यालय से सटा खांड़ा गांव जहां कोरोना संक्रमण से जिले में ३० अप्रैल को पहला पॉजिटिव केस सामने आया था। सम्बंधित व्यक्ति में कोरोना की पुष्टि के बाद गांव में भय का माहौल बन गया, आस-पड़ोस के लोगों में खुद के प्रति सशंक्ति हो गए। यहां तक खांडा गांव के आसपास के गांवों के लोगों ने गांव में आवाजाही बंद कर दी। गांवों से गुजरने वाला फेरी का ठेला बंद हो गया। घरों के सामने सन्नाटे पसर गए। लोग जरूरत के अनुसार घरों से बाहर निकलने लगे। कुछ दिन तक गांव का यही हाल बना रहा, लेकिन जैसे ही १४ दिनों के बाद कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति का रिपोर्ट निगेटिव आया और वह गांव पहुंचा तो गांव में खुशी का माहौल बन आया। लोगों में राहत की सांस ली। इस दौरान सम्बंधित व्यक्ति चिकित्सकों की सलाह के अनुसार अपने घर में माहभर तक घर में रहा, आसपास के गांवों के लोगों ने भी सामान्य स्थिति देखते हुए फिर से आवाजाही आरम्भ कर दी। अब गांव में पहले की तरह सामान्य जनजीवन हो गया है। अब ग्रामीण घरों से बाहर निकलते ही चेहरे पर मास्क और गांव में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों को कोरोना संक्रमण से बचने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और मास्क लगाकर ही बाहर निकलने जैसी जानकारी भी दे रहे हैं। ग्रामीण राममनोहर ने बताया कि गांव में कोरोना संक्रमण की जानकारी के बाद थोड़ा सा भय का माहौल जरूर बना था, आसपास के ग्रामों के लोगों ने खांडा गांव से दूरी बना ली थी। अगर गांव के लोग भी दूसरे गांव की ओर जाते थे तो उनसे दूसरे गांव के लोग दूरी बनाते हुए निकल जाते थे। खेतों में मजदूरों को काम के लिए नहीं बुलाते थे। लेकिन जैसे ही जानकारी मिली कि सम्बंधित व्यक्ति स्वस्थ्य होकर वापस लौट आया है। अब गांव में पूर्व की भांति आवाजाही रहे हैं।
बॉक्स: हिम्मत से ली काम और ग्रामीणों को सुरक्षा अपनाने दी सलाह
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ममता गुप्ता जो सम्बंधित व्यक्ति के पड़ोसी है बताती है कि जिस दिन सूचना मिली कि उनका पड़ोसी पीडि़त व्यक्ति है, डर गई थी। लेकिन हिम्मत जुटाते हुए खुद सुरक्षा उपायों को अपनाते हुए परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित किया। घरों में महिलाओं की आवाजाही को बंद रखा। पीडि़त व्यक्ति के परिजनों ने भी सहयोग दिया और माहभर घरों से बाहर नहीं निकले। गांव में हरेक घर जाकर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने की सलाह दी। घर पर बाहर से आने के बाद हाथ धोने और दूसरे से दूरी बनाकर ही बातचीत करने की अपील की।
बॉक्स: पीडि़त अब कर रहा मजदूरी, भर रहा परिवार का पेट
कोरोना से पीडि़त रहा व्यक्ति अब स्वस्थ्य होकर गांव में मजदूरी कर रहा है और अपने परिजनों का पेट भर रहा है। ममता गुप्ता ने बताया कि वह रोजाना मजदूरी के लिए गांव या आसपास के गांवों में जा रहा है। घर में पांच सदस्य है। सभी स्वस्थ्य है।
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