
नवजातों को मिले भगवान: जब बेकार वेंटीलेटर को सुधार डॉक्टर ने बचाई नवजात की जान
एसएनसीयू वार्ड को मिली वेंटीलेटर की सुविधा, रीवा मेडिकल कॉलेज से नवजातों को मिली राहत
अनूपपुर को छोडक़र शहडोल सम्भाग में नहीं यह लाईफ सपोर्ट उपकरण
अनूपपुर। धरती पर डॉक्टर को भगवान का स्वरूप माना जाता हैं, जो मां के गर्भ से लेकर उसकी आंखिरी संास तक अपनी सेवाभाव व विलक्षणता का परिचय देकर मानव को नया जीवन देने का प्रयास करता है। जिला अस्पताल अनूपपुर के एसएनसीयू वार्ड में कार्यरत बच्चा विशेषज्ञ ब्रजेश पटेल भी सम्भवत: यही सोच अपनाकर एसएनसीयू वार्ड में भर्ती होने वाले गम्भीर नवजातों को नई जिदंगी देने में सफलता हासिल की है। वर्ष २०१६ में शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए वेंटीलेटर के बंद मशीन को फिर से चालू कराकर असामायिक मौत के शिकार बन रहे नवजातो ंको मौत के मुंह से निकाल लिया है। डॉक्टर ने प्रायौगिक रूप में कोतमा से आए २ किलोग्राम के कुपोषित गम्भीर बच्चे को वेंटीलेटर की सुविधा देकर उसकी जान बचाने में अपनाया। डॉ. ब्रजेश पटेल के अनसुार ७ जनवरी की रात १२बजे कोतमा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवजात का जन्म हुआ था। लेकिन जन्म के साथ ही बच्चा सांस नहीं ले पा रहा था। जिसे देखते हुए तत्काल ऑक्सीजन लगाते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल आने के बाद बच्चे को ऑक्सीजन सिलेंडर पर सांसे देकर पुन: रीवा मेडिकल भेजने की तैयारी हुई। लेकिन डॉक्टर ने सोचा जब वेंटीलेटर मशीन उपलब्ध है तो क्यों ने उसका उपयोग किया जाए। फिर उन्होंने बंद बेकार मशीन को तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद स्टार्ट कर उसे न्यूनोट मोड पर लाडकर नवजातों के लिए उपयोगी बना दिया। इसके बाद अंतिम सांसे गिन रहे नवजात को वेंटीलेटर पर डाल उसका इलाज आरम्भ किया, जो अब उम्मीदों की सांसे ले रहा है। यानि अब जिला अस्पताल में आने वाले क्रिटिकल नवजातों को सांस की समस्या के कारण रीवा मेडिकल अस्पताल नहीं भेजा जा सकेगा। बच्चों को अब एसएनसीयू वार्ड में ही वेंटीलेटर मशीन के लाईफ सपोर्ट पर रखकर बेहतर स्वास्थ्य लाभ दिया जा सकेगा। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि जिला अस्पताल के लिए उपलब्ध कराया गया वेंटीलेटर बड़े बच्चों के लिए मंगवाया गया था। लेकिन एसएनसीयू वार्ड की स्थापना के बाद यहां नवजातों के मौत के आंकड़े अधिक बढ़ गए। माना जाता है कि प्रतिमाह १० नवजात में ४ नवजातों की मौत हो जाती है। इसे भोपाल स्वास्थ्य संचालनालय ने भी गम्भीर मानते हुए बच्चों को बचाने बार बार हिदायत दी थी। लेकिन हर बार लाइफ सपोर्ट सिस्टम के अभाव में गम्भीर केसेज को शहडोल या रीवा भेजने के दौरान मौत हो गई। डॉक्टर के अनुसार मौत का मुख्य कारण फेंफड़ा और हर्ट का काम नहीं करना होता है। इसमें फेंफड़ा को वेंटीलेटर से सपोर्ट देते हुए हार्ट को आयनाप्रोप्स देकर नई जिदंगी दी जा सकती है। यह सुविधा वृहत तथा अधिक लागत वाली होती है इसलिए सिर्फ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध होती है। इसके लिए अस्पताल से रीवा भेजा जाता था। लेकिन अब यह जिला अस्पताल के एसएनसीयू में उपलब्ध होगी। जिससे अमूनन २५-३० फीसदी आकस्मिक मौत को रोकी जा सकेगी।
बॉक्स: तो नवजातों को मिलेगी राहत
डॉ. ब्रजेश पटेल के अनुसार वेंटीलेटर मशीन के माध्यम से शरीर की वास्तविक क्रियाओं खासकर प्लस रेट, ऑक्सीजन रेस्यू, हार्ट का आसानी से अध्ययन किया जाता है। इससे डॉक्टर आसानी से आगे की रणनीतियों पर कार्य करते हैं। जबकि इससे पूर्व नवजातों को थोड़ी भी क्रिटिकल स्टेज पहुंचते ही मजबूरी में उन्हें रेफर कर दिया जाता था। लेकिन अब डॉक्टर आसानी से वेंटीलेटर मशीन के माध्यम से नवजातों का उपचार कर सकेंगे। उनका कहना है कि इससे मौत के आंकड़े १० फीसदी से भी कम हो सकती है। क्योकि ३-४ फीसदी केस रेफलर होते ही है। लेकिन इससे गरीब परिवारों के साथ नवजातों को अब तत्काल उपचार लाभ देकर जिंदा रखा जा सकेगा।
वर्सन:
यह एसएनसीयू वार्ड की सबसे बड़ी सौगात कही जा सकती है। अब बच्चों को बाहर भेजने की आवश्यकता नही होगी। वेंटीलेटर के माध्यम से डॉक्टर आसानी से बच्चों को उपचार कर सकेंगे।
डॉ. आरपी श्रीवास्तव, सीएमएचओ अनूपपुर।
Published on:
16 Jan 2019 08:00 am
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