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भगवान भरोसे जिले के प्रसव पीडि़त माताएं व घायल मरीज; ब्लड बैंक में मात्र १६ यूनिट खून, पुष्पराजगढ़ सीएचसी में नहीं एक भी यूनिट रक्त की उपलब्धता

भगवान भरोसे जिले के प्रसव पीडि़त माताएं व घायल मरीज; ब्लड बैंक में मात्र १६ यूनिट खून, पुष्पराजगढ़ सीएचसी में नहीं एक भी यूनिट रक्त की उपलब्धता

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Mothers and injured patients of God Bharosa district Only 16 units of

भगवान भरोसे जिले के प्रसव पीडि़त माताएं व घायल मरीज; ब्लड बैंक में मात्र १६ यूनिट खून, पुष्पराजगढ़ सीएचसी में नहीं एक भी यूनिट रक्त की उपलब्धता

अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़, खून के अभाव में मरीज शहडोल हो रहे रेफर
अनूपपुर। जिला अस्पताल में मरीजों के लिए खून की कमी एक बार फिर से उनके अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। गम्भीर रूप से घायल मरीजों के लिए उनके ग्रूप अनुसार खून की उपलब्धता नहीं हो रही है। जबकि प्रसव के लिए खून की कमी जूझ रहे माताओं को अस्पताल शहडोल रेफर कर रहा है, जहां यात्रा के दौरान जिंदगी और मौत से जूझ रही माताओं व उनके परिजनों को भी यह समझ में नहीं आ रहा कि क्या करें? इसका मुख्य कारण जिला अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों पर खून की कमी बताई जा रही है। जिला अस्पताल के ३०० यूनिट वाले मदर ब्लड बैंक में वर्तमान में मात्र १६ यूनिट खून उपलब्ध है, जो खून उपलब्ध है उनका उपयोग नाममात्र है। जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुष्पराजगढ़ में २५ यूनिट की क्षमता वाले ब्लड यूनिट में एक भी यूनिट की मात्रा स्टॉक में नहीं है। जिसके कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र राजेन्द्रग्राम, बेनीबारी, अमरकंटक में उपचारत मरीजों की जान भगवान भरोसे बंधा हुआ है। यहीं कारण है कि फिलहाल सडक़ हादसे से लेकर सिजेरियन प्रसव के लिए आने वाली माताओं को रक्त की कमी में अनूपपुर के बजाय शहडोल या अन्य जिलों जिलों की ओर रेफर किया जा रहा है। इसमें मरीजों के साथ साथ परिजनों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन दूसरी ओर जिला अस्पताल प्रशासन इन परेशानियों से अंजान बना हुआ। जबकि शासन की नजरों में अनूपपुर कुपोषित जिलों में शामिल है तथा यहां रक्त अल्पता के शिकार मरीजों की संख्या सर्वाधिक है। जिसे देखते हुए वर्ष २०१६ में ५ विभिन्न ग्रूपों के ३०० यूनिट क्षमता वाले मदर ब्लड बैंक की स्थापना कराई गई थी, ताकि जिला अस्पताल से अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों सहित खुद जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को पर्याप्त मात्रा में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा सके। लेकिन वर्तमान में जिला अस्पताल में मात्र १६ यूनिट खून शेष है। उपलब्ध ब्लड ग्रूपों में ए पॉजिटिव ३ यूनिट, बी पॉजिटिव ८ यूनिट, एबी पॉजिटिव ० यूनिट, एबी निगेटिव ० यूनिट, तथा ओ पोजिटिव ३ यूनिट, बी निगेटिव १ यूनिट, ओ निगेटिव १ यूनिट शेष है। जिला अस्पताल लैब की जानकारी के अनुसार मदर ब्लड बैंक में ३०० यूनिट ब्लड रखना अनिवार्य है। हालंाकि इसे ३२५ यूनिट तक रखने की क्षमता में स्थापित किया गया है। इसमें प्रतिमाह जिला अस्पताल को १५०-२०० यूनिट की आवश्यकता होती है। इनमें सर्वाधिक ग्रूप ओ पोजिटिव लगभग ६०-७५ यूनिट तथा सबसे कम एबी पॉजिटिव १०-१२ यूनिट खर्च होती है। लेकिन पिछले दा़े माह किसी भी रक्तदान शिविर के अभाव में अब ब्लड बैंक में नाममात्र में विभिन्न ग्रूपों के ब्लड शेष बचे हैं। सूत्रों की जानकारी में ब्लड डोनेट के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ८ अप्रैल के उपरांत अबतक कोई शिविर नहीं लगाया गया है। जबकि इससे पूर्व अप्रैल माह में लगाए गए रक्तदान शिविर से १५५ यूनिट ब्लड की आपूर्ति हो सकी थी।
जिला अस्पताल की जानकारी के अनुसार जिले में प्रतिदिन १०-१५ छोटे-बड़े सडक़ हादसे होते हैं। इनमें आधा दर्जन केसेज गम्भीर होते हैं। वहीं जिला अस्पताल में रोजाना १२-१३ माताएं प्रसव के लिए भर्ती होती है, जिनमें ४-५ प्रसव ऑपरेशन के द्वारा कराया जाता है। लेकिन इन ऑपरेशन में पूर्व से कुपोषित माताओं के कारण रक्त की अधिक मात्रा की आवश्कता पड़ती है। जिसमें वर्तमान में रक्त कमी के कारण इन्हें शहडोल रेफर कर दिया जाता है।
वर्सन:
अस्पताल में खून की उपलब्धता कम है। इसके लिए जल्द ही रक्तदान शिविर का आयोजन कर रक्त उपलब्धता के प्रयास कराए जाएंगे।
डॉ. आरपी श्रीवास्तव, सीएमएचओ अनूपपुर।