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जिले के ५५ बैंकों में नहीं बड़ी और मोटी रकम, उपभोक्ताओं के जमा पैसे से बैंक कर रहा देनदारी

जिले के ५५ बैंकों में नहीं बड़ी और मोटी रकम, उपभोक्ताओं के जमा पैसे से बैंक कर रहा देनदारी

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No big and big money in the 55 banks of the district

एटीएम बूथों से नहीं निकल रही राशियां, अक्षय तृतीया पर आयोजित शादी ब्याह के लिए परेशान माता-पिता
अनूपपुर। जिले के राष्ट्रीयकृत और निजी संस्थानों के ५५ बैंक शाखाएं बड़ी और मोटी रकम के अभाव में एक बार फिर से नोटबंदी जैसे नजारे दिखा दिए हैं। जहां पैसे के लिए उपभोक्ताओं को दिनभर कतार लगने के बाद भी पर्याप्त राशियां नहीं मिल पा रही है। जबकि १८ अप्रैल को पडऩे वाले अक्षय तृतीया पर जिले में सैकड़ो परिवारों में शादी-विवाह का कार्यक्रम आयोजित होना तय है। बावजूद अपनी बेेटियों के हाथ पीले करने वाले माता-पिता को पैसे की उपलब्धता के लिए अपने एड़ी घिस-घिसकर लाल करने पड़ रहे हैं। यह हालात किसी एक बैंक शाखा या विकासखंड की नहीं बनी है। बल्कि अनूपपुर जिले के अंतर्गत चारों विकासखंडों में संचालित ५५ राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओं सहित उनके अधीनस्थ संचालित होने वाले ६५ एटीएम बूथों की भब बनी हुई है। जहां बड़ी और मोटी रकम का अभाव बना है। खासकर २००० की बड़ी नोट बाजारों से गायब है। वहीं ५०० रूपए के नोट भी कम संख्या में नजर आए हैं। अधिकांश बूथ सेंटर पैसे की कमी के कारण वीरान या शटर बंद की स्थिति में हैं। जो कुछ बूथ खुल भी रही है वहां पैसे के अनुपात में अधिक उपभोक्ताओं की भीड़ के कारण चंद समय उपरांत बूथ खाली हो जाती है। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक पीसी पांडेय के अनुसार भोपाल मुख्य आरबीआई शाखा से ही राष्ट्रीयकृत बैंकों सहित निजी बैंकों के मुख्य शाखाओं के लिए पैसे की आवक नहीं हो रहा है। भोपाल द्वारा जिले के लिए १५००-२००० करोड़ की जगह मात्र ५-६ करोड़ की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इनमें पैसे की कमी के कारण उपभोक्ताओं द्वारा जमा किए जाने वाले पैसे को ही जरूरतमंद उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं उनका कहना है कि यह अव्यवस्था सिर्फ अनूपपुर जिले में नहीं बन रही है। यह स्थिति मप्र. के समस्त जिलों के लिए भी बन रही है। जिसके कारण बैंकिंग कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्रबंधक पांडेय के अनुसार अनूपपुर जिले में बैंकिंग कारोबार भी प्रतिदिन १०००-१५०० करोड़ की है। जिसके कारण वर्तमान राशियां आधी से भी कम है। विदित हो कि नवम्बर २०१६ के दौरान नए नोटों के बाजार में लाने की कवायत में तीन माह तक पैसे की बनी किल्लत की भांति वर्तमान में बाजार में पैसे की तंगी बनी हुई है। बाजार में पैसे की कमी क्यों बन रही है खुद बैंक अधिकारियों को भी नहीं पता है। बैंकिंग खातों से जुड़े उपभोक्ताओं के खाते में लाखों रूपए के आवंटन के बाद भी जेबें खाली है। वहीं पिछल एक माह बाद घरों में बजने वाली शहनाई पर पैसे की तंगी ने परिजनों को मुश्किल में डाल दिया है। १८ अप्रैल को अक्षय तृतीया पर होने वाले शादी व्याह के मौके पर परिजनों के हाथ तंग है। वहीं बैंक द्वारा उन्हें पर्याप्त राशियां उपलब्ध कराने में असमर्थता पर किसान फिर से सूदखोंरो की ओर आस लगाए हैं।
वर्सन:
भोपाल से ही पैसे का आवंटन नहीं हो रहा पा रहा है। उपभोक्ताओं के सवालों का भी जवाब भी देना मुश्किल पड़ रहा है। लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। बैंकों में उपभोक्ताओं के पैसे उन्हें ही वापस देकर देनदारी चला रहे हैं।
पीसी पांडेय, लीड बैंक प्रबंधक अनूपपुर।
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