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पुलिस ने अतिक्रमण से मुक्त कराया शासकीय हैंडंपप

बुढानपुर गांव में पुलिस की लगी चौपाल

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Police rescued the encroaching government Handnpp

पुलिस ने अतिक्रमण से मुक्त कराया शासकीय हैंडंपप

कोतमा. पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना प्रभारी द्वारा ग्रामों में जन सवंाद कार्यक्रम के दिए निर्देश में 7 जून को बुढानपुर गांव में पुलिस की सभा लगाई गई। कार्यक्रम में एसडीओपी एसएन प्रसाद, थाना प्रभारी आरके मिश्रा, ज्ञान सिंह, कृष्णदत्त मिश्रा, शिवाकांत मिश्रा सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल हुए। जन सवंाद के दौरान ग्रामीणों ने गांव में होने वाले अवैध शराब, मादक पदार्थो की बिक्री सहित अवैध ध्ंाधों पर रोक लगाने की मांग की। जिस पर अधिकारियों के द्वारा सभी असामाजिक कार्य करने वालों की सूची बनाते हुए उन्हें सख्त हिदायत दी।
इसी दौरान गांव में बोर हुए शासकीय हैंडपंप को एक शख्स के द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत पर एसडीओपी एंव थाना प्रभारी द्वारा स्थल पर जाकर हैंडपंप को कब्जे से मुक्त कराते हुए समस्या का त्वरित निराकरण किया गया। जिसपर थाना प्रभारी ने सीमांकन के आवेदन देने एंव हल्का पटवारी से सीमांकन की बात कही।

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बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे कॉलरी कर्मचारी

बदरा. एसईसीएल की श्रमिक कॉलोनी में प्रशासन की लापरवाह कार्यशैली के कारण कई जगहो से पाईप में टूट फूट होने और पुरानी पाईप न बदलने से कॉलोनियों में पर्याप्त जल आपूर्ति की समस्या गहरा गई है। जलापूर्ति नहीं होने से माइनस कॉलोनी कर्मचारियों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। पिछले एक वर्ष से जर्जर पाइप लाईन में जगह-जगह ***** हो गई है। यहां से एसईसीएल की विभिन्न कॉलोनियों के हजार से अधिक कामगार आवासों सहित केंद्रीय चिकित्सालय, रेस्ट हाउस, महाप्रबंधक कार्यालय, एवं खान बचाव केंद्र में जल आपूर्ति की जाती है। सूत्रों के अनुसार जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत जमुना कॉलरी स्थित ९० लाख से नए फिल्टर प्लांट का शुभारम्भ किया गया था। जिसमें 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिनी ओसीएम से पानी को इस फिल्टर प्लांट तक लाकर लगभग 12 लाख लीटर पानी को फिल्टर किया जाता।
हालांकि क्षेत्र मे लगभग 9 लाख लीटर पानी खर्च होता है। लेकिन इस प्लांट में 3 लाख लीटर पानी अधिक फिल्टर हो पाता। लेकिन अब यह लोगों की जलापूर्ति के लिए बेकार साबित हो रही है। श्रमिको का मानना है 90 लाख कि लागत से बना ये फिल्टर प्लांट बन तो गया लेकिन जल समस्या अभी भी बरकरार क्यों है?